मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में विकास निधि के वितरण को लेकर राजनीति तेज हो गई है। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड ने सत्ताधारी दल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि फंड वितरण में खुलेआम भेदभाव किया जा रहा है और विरोधी दलों के पार्षदों के साथ अन्याय हो रहा है।


गायकवाड ने आरोप लगाया कि बीएमसी में भाजपा-शिंदे गुट की सत्ता आने के बाद से विकास निधि का असमान वितरण किया जा रहा है। सत्ताधारी दल के पार्षदों को करोड़ों रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि कांग्रेस के पार्षदों को महज कुछ लाख रुपये देकर नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पैसा किसी पार्टी का नहीं बल्कि मुंबई की जनता का है और इसका उपयोग समान रूप से विकास कार्यों के लिए होना चाहिए।


उन्होंने बताया कि स्थायी समिति को मिले 800 करोड़ रुपये के फंड में से सत्ताधारी नेताओं को भारी-भरकम राशि दी गई है। भाजपा के सभागृह नेता गणेश खणकर और स्थायी समिति अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे को 20-20 करोड़ रुपये, जबकि उपमहापौर संजय घाड़ी को 10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। इसके अलावा भाजपा के सभी पार्षदों को करीब 2.25 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जबकि कई विपक्षी पार्षदों को सिर्फ 25 लाख रुपये ही मिले हैं।
गायकवाड ने यह भी सवाल उठाया कि समाजवादी पार्टी, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) और राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) के पार्षदों को पर्याप्त फंड दिया गया, जबकि कांग्रेस के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है। उन्होंने भाजपा से इन पार्टियों के साथ कथित “हितसंबंधों” पर भी जवाब मांगा।
उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्षद भी जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं, और उन्हें कम निधि देना उनके क्षेत्र के नागरिकों को विकास से वंचित करने जैसा है। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर चुप नहीं बैठेगी और भेदभाव के खिलाफ जवाब मांगती रहेगी।


