अदूरदर्शिता के कारण 19 करोड़ का इन्फ्रास्ट्रक्चर रेलवे को करना होगा ध्वस्त।

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मुंबई वार्ता संवाददाता


मुंबई में मध्य रेलवे की अमृत भारत योजना के तहत परळ रेलवे स्टेशन पर करीब 19 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की गई नई सुविधाओं पर अब खतरा मंडरा रहा है। प्रस्तावित 5वीं और 6वीं रेल लाइन के निर्माण के कारण इन सुविधाओं का कुछ हिस्सा हटाना पड़ सकता है, जिसमें नया टिकट बुकिंग कार्यालय भी शामिल है।
गौरतलब है कि इस स्टेशन का उद्घाटन पिछले वर्ष नरेंद्र मोदी के हाथों हुआ था।


दरअसल, प्रस्तावित परेल टर्मिनस प्रोजेक्ट को मुख्य रेल मार्ग से जोड़ने के लिए 5वीं और 6वीं लाइन का निर्माण किया जाना है। इसके चलते स्टेशन के पूर्वी हिस्से में बनाई गई नई इमारत, आधुनिक टिकट बुकिंग ऑफिस, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, शौचालय, मिनी गार्डन, दोपहिया पार्किंग और बैठने की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।


रेलवे अधिकारियों के अनुसार, लाइन के एलाइनमेंट के कारण कुछ सुविधाओं को हटाना पड़ सकता है। खासतौर पर मिनी गार्डन पर असर तय माना जा रहा है, जबकि टिकट काउंटर और पार्किंग को बचाने के लिए अभी योजना बनाई जा रही है। हालांकि, अंतिम खाका अभी तय नहीं हुआ है।


यह परियोजना पुराने वर्कशॉप की जमीन पर करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले परेल टर्मिनस से जुड़ी है। इस टर्मिनस के जरिए उपनगरीय और लंबी दूरी की ट्रेनों को अलग-अलग संचालित करने की योजना है, जिससे परिचालन क्षमता बढ़ेगी।


फिलहाल स्टेशन पर फुटओवर ब्रिज के विस्तार का काम जारी है, साथ ही एस्केलेटर और नए सीढ़ियों का निर्माण भी किया जा रहा है।
कुर्ला से परेल के बीच 5वीं-6वीं लाइन परियोजना के पहले चरण में काम वर्कशॉप तक होगा, जबकि दूसरे चरण में परेल से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस तक नई लाइन बिछाई जाएगी। इस दौरान कई मौजूदा संरचनाओं में बदलाव संभव है।


नए परेल टर्मिनस में दो आइलैंड प्लेटफॉर्म, चार प्लेटफॉर्म लाइन (26 कोच की ट्रेनों के लिए), 620 मीटर लंबी दो स्टेबलिंग लाइन, वाहनों के लिए अलग डेक और पार्किंग की सुविधा प्रस्तावित है। इसके अलावा, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर रोड से जोड़ने के लिए 15 मीटर चौड़ी सड़क, रैंप और वायाडक्ट भी बनाया जाएगा।


रेलवे का मानना है कि नए टर्मिनस के बनने से सीएसएमटी पर दबाव कम होगा और परेल एक महत्वपूर्ण इंटरचेंज हब के रूप में उभरेगा।

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