मुंबई वार्ता संवाददाता

डिलिमिटेशन बिल को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे ने शनिवार को कहा कि यह बिल सत्ताधारी सरकार द्वारा राजनीतिक लाभ के लिए संविधान में बदलाव करने का प्रयास था, जिससे सीटों की संख्या बढ़ाकर कई राज्यों की आवाज को कमजोर किया जा सकता था।


आदित्य ठाकरे ने कहा कि यह बिल दरअसल “अनुचित जीत सुनिश्चित करने वाला डिलिमिटेशन बिल” था, जिसका उद्देश्य निर्वाचन क्षेत्रों की हेरफेर (गैर-निष्पक्ष पुनर्रचना) कर चुनावी फायदे लेना था। उन्होंने बताया कि यह बिल संसद में पारित नहीं हो सका, जो लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
वहीं शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने स्पष्ट किया कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही पारित किया जा चुका है और उसमें 33 प्रतिशत सीटों का प्रावधान है।
राउत ने कहा, “यह विपक्ष की नहीं बल्कि देश की महिलाओं की जीत है। हमने महिलाओं के नाम पर हो रहे कथित धोखे के खिलाफ वोट दिया है। हम महिला आरक्षण के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इसे सही तरीके से लागू किया जाना चाहिए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं को पैसे देकर वोट खरीदने की कोशिश की जाती है और कहा कि अगर ऐसा बंद किया जाए तो असली समर्थन किसके साथ है, यह स्पष्ट हो जाएगा।
आदित्य ठाकरे ने अपने बयान में यह भी कहा कि सरकार को अब 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले मौजूदा 543 सीटों में ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करना चाहिए, तभी सरकार की मंशा सही मानी जाएगी।


