श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

पूर्व एनसीबी जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े रविवार को नवी मुंबई के वाशी में आयोजित एक कार्यक्रम में युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करते नजर आए। इस दौरान छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक स्थानीय समूह की भी शुरुआत की गई, जो पुलिस को ड्रग्स से जुड़े अपराधों पर रोक लगाने में सहयोग करेगा।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वानखेड़े ने कहा कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और उससे पहले डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने देखा कि नवी मुंबई क्षेत्र में हाइड्रोपोनिक वीड, एमडी क्रिस्टल और एलएसडी जैसे नशीले पदार्थों का सबसे अधिक इस्तेमाल होता है।


बॉलीवुड से जुड़े विवादों का जिक्र किए बिना उन्होंने कहा, “नशीले पदार्थों की तस्करी ही नहीं, उनका सेवन करना भी अपराध है।”
अपने अनुभव साझा करते हुए वानखेड़े ने कहा कि अधिकांश युवा साथियों के दबाव में आकर ड्रग्स की ओर आकर्षित होते हैं ताकि उन्हें ‘अनकूल’ न कहा जाए। उन्होंने कहा, “यहीं से गलत रास्ते की शुरुआत होती है। ड्रग्स लेने के बाद कई युवाओं को ‘गुड ट्रिप’ या ‘बैड ट्रिप’ का अनुभव होता है और बैड ट्रिप की स्थिति में आत्महत्या जैसे गंभीर कदम तक उठाए जा सकते हैं, क्योंकि ड्रग्स दिमाग पर बुरा असर डालता है।”
कार्यक्रम का आयोजन करने वाले सज्जन शक्ति समूह के ब्रांड एंबेसडर मधु शंकर ने कहा कि समीर वानखेड़े ने युवाओं को साफ तौर पर समझाया कि किस तरह साथी दबाव के कारण ड्रग्स की लत जीवन को बर्बाद कर सकती है। उन्होंने कहा कि वानखेड़े जनभागीदारी के जरिए नशाखोरी और नार्को-टेररिज्म के बढ़ते खतरे से लड़ने के पक्षधर हैं।
इस मौके पर कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवा प्रतिभाओं को सम्मानित भी किया गया। वानखेड़े ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि नशे की गिरफ्त में आने के बजाय उन्हें अपने करियर पर ध्यान देना चाहिए और अपने पेशेवर जीवन के शुरुआती पांच वर्ष देश और समाज की सेवा को समर्पित करने चाहिए।
वहीं नेट-कनेक्ट फाउंडेशन के सामाजिक कार्यकर्ता बी. एन. कुमार ने कहा कि यदि बच्चे नशे की लत में फंस जाएं तो माता-पिता को एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय बच्चों की मदद करने पर ध्यान देना चाहिए।


