मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य मंत्री Ashish Shelar ने रत्नागिरी जिले के ऐतिहासिक गोपालगढ़ किले की स्वामित्व स्थिति, कानूनी पहलुओं और संरक्षण संबंधी मुद्दों पर विस्तृत अध्ययन कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जिला प्रशासन को दिए हैं।


मंत्रालय में मंत्री आशिष शेलार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में गोपालगढ़ किले के स्वामित्व विवाद, न्यायालयीन प्रक्रियाओं, पुरातात्विक महत्व तथा संभावित अधिग्रहण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में सांस्कृतिक कार्य विभाग के सचिव डॉ. किरण कुलकर्णी, राजस्व विभाग के उप सचिव संजय धारूरकर, उप सचिव नंदा राऊत, महेश वाव्हळ, पुरातत्व विभाग के निदेशक डॉ. तेजस गर्गे सहित रत्नागिरी के जिला कलेक्टर, चिपलून के उपविभागीय अधिकारी, गुहागर के तहसीलदार और अन्य अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।


बैठक में शेलार ने कहा कि गोपालगढ़ किले के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसकी निजी स्वामित्व स्थिति और मूल इतिहास की गहन जांच आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को उपलब्ध अभिलेखों, नीलामी प्रक्रिया, ‘इवैक्यूई प्रॉपर्टी’ (परित्यक्त संपत्ति) के दर्जे तथा संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच करने के निर्देश दिए।
मंत्री ने बताया कि मराठा काल में निर्मित यह किला आगे चलकर आंग्रे नौसेना की महत्वपूर्ण सैन्य चौकी रहा था। समुद्री सुरक्षा और पश्चिमी तट की जल-रणनीति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अपनी विशिष्ट स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक संरचना के कारण यह किला पुरातात्विक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
उन्होंने कहा कि किले परिसर में हुए कुछ अतिक्रमणों को प्रशासन द्वारा हटाए जाने के बाद मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए सभी कानूनी पहलुओं का अध्ययन किए बिना कोई जल्दबाजी में निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए। शेलार ने इवैक्यूई प्रॉपर्टी घोषित किए जाने से संबंधित दस्तावेजों, उस समय की प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए।
मंत्री आशिष शेलार ने रत्नागिरी जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि गोपालगढ़ किले से जुड़े सभी कानूनी, ऐतिहासिक और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन कर राज्य सरकार को सौंपी जाए, ताकि किले के संरक्षण और भविष्य की कार्रवाई पर उचित निर्णय लिया जा सके।


