मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र के श्रम मंत्री एडवोकेट आकाश फुंडकर ने कहा है कि राज्य सरकार श्रमिकों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और विभिन्न श्रमिक वर्गों की लंबित मांगों व समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ काम कर रही है। उन्होंने बताया कि सभी मांगों का व्यापक अध्ययन और आवश्यक जांच पूरी होने के बाद सरकार उचित नीतिगत निर्णय लेगी।


मंत्रालय में श्रम मंत्री की अध्यक्षता में सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) के प्रतिनिधियों के साथ आयोजित बैठक में ठेका श्रमिकों, निर्माण श्रमिकों, घरेलू कामगारों, आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं सहित विभिन्न श्रमिक वर्गों की लंबित मांगों पर विस्तृत चर्चा की गई।


बैठक में सीटू के प्रतिनिधि आबासाहेब चौगुले, धर्मा कांबळे, अशोक थोरात और किरण मोघे समेत अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
चर्चा के दौरान असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की समस्याओं की समीक्षा, न्यूनतम वेतन सलाहकार मंडल की स्थापना, ठेका श्रमिकों के मुद्दे, समान वेतन कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, विभिन्न उद्योगों के लिए न्यूनतम वेतन निर्धारण, सफाई कर्मचारियों और घरेलू कामगारों के लिए अलग नीति तथा आंगनवाड़ी एवं आशा कार्यकर्ताओं को सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
श्रम मंत्री फुंडकर ने बताया कि निर्माण श्रमिकों के पंजीकरण में पारदर्शिता लाने के लिए राज्यभर में 41 जांच दल कार्यरत हैं और सत्यापन प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि आधार लिंकिंग का कार्य तेजी से किया जा रहा है, ताकि पात्र घरेलू कामगारों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि राज्य के श्रमिकों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को और मजबूत बनाने हेतु जुलाई के अंत तक संबंधित कल्याणकारी बोर्ड का गठन किया जाएगा।
फुंडकर ने कहा कि श्रमिकों के हितों से जुड़े सभी लंबित मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर हल करने के लिए सरकार सभी संबंधित पक्षों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई करेगी।


