मुंबई वार्ता संवाददाता

भारतीय जनता पार्टी की लगभग हर जगह सत्ता होने के बावजूद उसे और अधिक सत्ता चाहिए। इसी सत्ता के लालच में भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों को पैरों तले कुचल रही है। विधान परिषद चुनाव को निर्विरोध कराने के लिए विपक्षी दलों के उम्मीदवारों को करोड़ों रुपये के ऑफर दिए जा रहे हैं। उम्मीदवारों से नामांकन वापस लेने के लिए भाजपा ने नैतिकता को ताक पर रखकर हर संभव हथकंडा अपनाया है। भाजपा को लोकतंत्र नहीं चाहिए, उसे ‘इलेक्शन सिस्टम’ नहीं बल्कि ‘नॉमिनेशन सिस्टम’ चाहिए। यह तीखा हमला महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने किया।


बुलढाणा में मीडिया से बातचीत करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आगे कहा कि वर्तमान में चल रहे विधान परिषद चुनाव का मतदाता वर्ग स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं, अर्थात यह एक सीमित मतदाता वर्ग है। लेकिन इस चुनाव में भी सत्ताधारी महायुति द्वारा खुलेआम ‘पैसा फेंको, तमाशा देखो’ का खेल खेला जा रहा है। विपक्षी उम्मीदवारों से नामांकन वापस लेने के लिए भाजपा-महायुति ने सत्ता और धन का दुरुपयोग किया है। षड्यंत्र, विश्वासघात और भारी पैमाने पर धन वितरण किया गया है। सत्ताधारी महायुति इस चुनाव का सामना अत्यंत विकृत तरीके से कर रही है, जो लोकतंत्र के लिए बिल्कुल भी अच्छा संकेत नहीं है।


उन्होंने कहा कि चुनाव लोकतंत्र का उत्सव होते हैं और उन्हें स्वस्थ तथा सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न होना चाहिए। लेकिन भाजपा की सत्ता की राक्षसी भूख बढ़ती जा रही है और उसी के साथ उसका अहंकार भी बढ़ा है। इसी का प्रभाव विधान परिषद चुनाव में भी दिखाई दे रहा है। भाजपा ने चुनाव में खुलेआम घोड़ाबाज़ारी की है और यह लोकतंत्र के लिए एक काला अध्याय है। इससे बाहर निकलने के लिए सभी को प्रयास करने होंगे।
भाजपा और चुनाव आयोग के बीच एक अनुचित गठजोड़ है। महाविकास आघाड़ी की सदस्य संख्या कम होने का इससे क्या संबंध है? यह प्रश्न उठाते हुए सपकाल ने कहा कि वर्ष 1984 में लोकसभा में भाजपा के केवल दो सांसद चुने गए थे, तब किसी ने सदस्य संख्या की बात नहीं की थी। सदस्य संख्या के आधार पर भाजपा की भाषा उसकी लोकतंत्र को समेटकर रखने की मानसिकता को दर्शाती है।


