मुंबई वार्ता संवाददाता

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्याध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने कहा है कि देश में विलय की राजनीति से अधिक महंगाई, बेरोजगारी और नीट परीक्षा जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी के विलय को लेकर न तो कोई चर्चा हुई है और न ही कोई प्रस्ताव आया है।
नागपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुप्रिया सुळे ने कहा कि सत्तापक्ष और विपक्ष को आपसी आरोप-प्रत्यारोप में समय गंवाने के बजाय महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे किसानों और आम नागरिकों को राहत देने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता ने राजनीतिक दलों को नीतिगत फैसले लेने और लोगों की समस्याओं का समाधान करने के लिए चुना है, न कि घर और पार्टियां तोड़ने के लिए।


उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी और सोनिया गांधी के बीच हुई मुलाकात में क्या चर्चा हुई, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। शरद पवार के पास किसी प्रकार का विलय प्रस्ताव नहीं आया है और न ही उनकी ओर से किसी को ऐसा प्रस्ताव दिया गया है।
सुप्रिया सुले ने कहा कि देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति बेहद चिंताजनक है और यह राजनीति करने का नहीं, बल्कि देश को बचाने का समय है। उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और नीट परीक्षा से जुड़े छात्रों के भविष्य जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।
रोहित पवार के अनशन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वह शुरू से उन्हें उपवास न करने की सलाह दे रही थीं, क्योंकि आगे बड़ी लड़ाई लड़नी है। उन्होंने मौजूदा सरकार को “असंवेदनशील” बताते हुए कहा कि किसानों के प्रति रोहित पवार की प्रतिबद्धता और संघर्ष पर उन्हें गर्व है।
सुले ने बताया कि 24 घंटे से अधिक समय तक बिना भोजन के रहने और भीषण गर्मी के बावजूद रोहित पवार किसानों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जो उनके समर्पण को दर्शाता है।


