श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

महाराष्ट्र में सरकारी लीज (भाड़ेपट्टा) की जमीनों पर खुद को मालिक बताने वाली संस्थाओं, कंपनियों, प्राधिकरणों और व्यक्तियों को राज्य सरकार ने बड़ा झटका दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने निर्णय लिया है कि ऐसी सभी जमीनों के अधिकार अभिलेख (7/12 और अन्य रिकॉर्ड) में कब्जेदार के रूप में केवल ‘महाराष्ट्र शासन’ का नाम दर्ज किया जाएगा।


राजस्व विभाग ने इस संबंध में परिपत्र जारी करते हुए सभी जिलाधिकारियों को अगले तीन महीनों के भीतर विशेष अभियान चलाकर रिकॉर्ड अपडेट करने के निर्देश दिए हैं।
राज्य सरकार द्वारा कई व्यक्तियों और संस्थाओं को 30, 99 अथवा 999 वर्षों की लंबी अवधि के लिए जमीनें लीज पर दी गई थीं। लेकिन कई मामलों में कब्जेदार के कॉलम में महाराष्ट्र शासन के बजाय लीजधारकों के नाम दर्ज कर दिए गए। अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा समय पर उचित प्रविष्टियां नहीं किए जाने के कारण अनेक लीजधारक इन जमीनों को अपनी निजी संपत्ति मानने लगे, जिससे कई न्यायिक विवाद भी उत्पन्न हुए।
अब सरकार ने इस स्थिति पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाया है। नए निर्देशों के अनुसार लीज पर दी गई सभी सरकारी जमीनों के अधिकार अभिलेख में कब्जेदार के रूप में केवल महाराष्ट्र शासन का नाम दर्ज करना अनिवार्य होगा।
लीजधारकों का नाम अब ‘अन्य अधिकार’ कॉलम में दर्ज होगा
लीजधारक का नाम, लीज की अवधि और जमीन किस शर्त पर दी गई है, इसकी जानकारी अब ‘अन्य अधिकार’ (Other Rights) कॉलम में दर्ज की जाएगी।
■ तीन महीने की विशेष मुहिम
सभी जिलाधिकारियों को तत्काल विशेष अभियान चलाकर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तीन महीनों के भीतर रिकॉर्ड अपडेट करने का निर्देश दिया गया है। महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता, 1966 लागू होने से पहले किसी भी कानून के तहत स्थायी अथवा नवीनीकरण विकल्प के साथ 50 वर्षों के लिए दिए गए पट्टों पर संहिता की धारा 29(3)(क) के तहत ‘भोगवटादार वर्ग-2’ के प्रावधान लागू होंगे।
ऐसे मामलों में जिलाधिकारियों को 30 दिनों के भीतर ‘भोगवटादार वर्ग-2’ की प्रविष्टि दर्ज कर सरकार को रिपोर्ट सौंपने का आदेश भी दिया गया है।
■ मुंबई में भी कसी जाएगी लगाम
मुंबई शहर में लागू नियमों के तहत मौजूदा सभी पट्टों के हस्तांतरण संबंधी प्रतिबंधों की प्रविष्टियां भी सरकारी जमीनों के अधिकार अभिलेख में तत्काल दर्ज की जाएंगी। इससे मुंबई के प्रमुख और महंगे इलाकों में सरकारी जमीनों पर मालिकाना हक का दावा करने वालों पर अंकुश लगेगा।राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने कहा
“मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, सटीक और नागरिक हितैषी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकारी लीज की जमीनों के रिकॉर्ड के संबंध में पूरे राज्य में एक समान और स्पष्ट व्यवस्था स्थापित करने के लिए ये निर्देश जारी किए गए हैं। इससे सरकारी जमीनों से संबंधित जानकारी अधिक सटीक होगी, अनावश्यक विवाद कम होंगे और राजस्व प्रबंधन अधिक मजबूत बनेगा।”


