मुंबई वार्ता संवाददाता

शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे गुट के प्रमुख उद्धव ठाकरे और राज्यसभा सांसद संजय राउत पर जमकर निशाना साधा। ठाकरे गुट में संभावित टूट की अटकलों के बीच शिंदे ने 2022 की बगावत का जिक्र करते हुए एक और बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के संकेत दिए।


एकनाथ शिंदे ने कहा, “चार साल पहले मैंने डॉक्टर नहीं होते हुए भी एक ऑपरेशन किया था। मौजूदा परिस्थितियों में भी ऐसा ऑपरेशन करने की क्षमता रखता हूं।” इसे उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों के संभावित दल-बदल के संदर्भ में देखा जा रहा है।


उद्धव ठाकरे पर हमला बोलते हुए शिंदे ने कहा कि उनका अहंकार ही नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर कर रहा है। उन्होंने कहा, “वह कहते हैं कि जिसे जाना है, वह जा सकता है। यह अहंकार है। उनके अहंकार का गुब्बारा पहले ही फूट चुका है। कोई नेता इतना घमंडी नहीं होना चाहिए कि लोग उसे छोड़कर चले जाएं। अब पार्टी में केवल उनकी तारीफ करने वाले लोग ही बचे हैं।”
शिवसेना प्रमुख ने राज्यसभा सांसद संजय राउत पर भी तंज कसते हुए कहा कि वह ‘ऑपरेशन टाइगर’ को ‘ऑपरेशन वुल्फ’ कहकर उसकी आलोचना कर रहे हैं। शिंदे ने कहा, “वह तो कंपाउंडर हैं, ऑपरेशन पर टिप्पणी कैसे कर सकते हैं? ऐसा ऑपरेशन करने के लिए बाघ का कलेजा चाहिए। मेरे पास बाघ का दिल है, भेड़िये का नहीं। शेर की खाल पहन लेने से भेड़िया शेर नहीं बन जाता।”
विपक्षी नेताओं के बयानों का जवाब देते हुए शिंदे ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा, “कुछ लोग हमें पैरों से मारने की धमकी दे रहे हैं। अगर उनमें हिम्मत है तो सामने आकर दिखाएं। शिवसैनिक उन्हें छोड़ेंगे नहीं।”
2022 की बगावत के दौरान के माहौल को याद करते हुए शिंदे ने कहा कि उन्हें मुंबई में प्रवेश करने और वर्ली से गुजरने को लेकर धमकियां दी गई थीं। उन्होंने कहा, “मैं मुंबई एयरपोर्ट से अकेला वर्ली पहुंचा था, लेकिन धमकी देने वाले घरों में ही बैठे रहे। मैं ऐसी धमकियों से डरने वाला नहीं हूं।”
शिंदे ने उद्धव ठाकरे गुट पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वहां नेताओं और सांसदों को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जाता है और बाद में उनकी तारीफ की जाती है। उन्होंने दावा किया कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को नगर निगम, ग्राम पंचायत और अन्य स्थानीय निकायों के चुनावों में लगातार हार का सामना करना पड़ा है।


