मुंबई वार्ता संवाददाता

छह सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद अब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच विधायकों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। शिंदे गुट की ओर से कथित तौर पर विधायकों के लिए “ऑपरेशन टाइगर” चलाए जाने के संकेत दिए जाने को उद्धव ठाकरे गुट ने गंभीरता से लिया है।


सूत्रों के अनुसार, शिंदे गुट के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया है कि राज्य के लगभग 14 विधायक पार्टी बदलने की स्थिति में हैं और उन्हें जल्द ही सीधे राजभवन ले जाया जा सकता है। इस बयान के बाद उद्धव ठाकरे गुट में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
विधानमंडल के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे स्वयं अपने सभी विधायकों को संबोधित करेंगे। पार्टी नेतृत्व ने किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने और प्रत्येक विधायक के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए एक वरिष्ठ नेता को विशेष जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी से संबंधित किसी भी गतिविधि या छोटी से छोटी जानकारी तत्काल ‘मातोश्री’ तक पहुंचाने को कहा गया है। वहीं, मुंबई से चुने गए लगभग दस विधायकों के शिंदे गुट में जाने की संभावना कम मानी जा रही है, फिर भी पार्टी नेतृत्व किसी प्रकार का जोखिम लेने के पक्ष में नहीं है।
यह भी कहा जा रहा है कि मुंबई के बाहर के विधायकों से संपर्क साधने की जिम्मेदारी फिलहाल उद्धव गुट में मौजूद दो विधायकों को सौंपी गई है। इन दोनों नेताओं की गतिविधियों पर भी बारीकी से नजर रखी जा रही है।
उद्धव गुट के नेताओं का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के नए सांसद फिलहाल कोई बड़ा राजनीतिक फैसला नहीं लेंगे। हालांकि, जिन क्षेत्रों से सांसदों ने दल बदला है, वहां के जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
पार्टी के एक नेता ने सवाल उठाया कि यदि विकास निधि नहीं मिलने को आधार बनाकर जनप्रतिनिधि दल बदल रहे हैं, तो यह लोकतांत्रिक राजनीति के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
राज्य की राजनीति में बढ़ती इस उठापटक के बीच आगामी विधानसभा सत्र के दौरान दोनों शिवसेना गुटों की रणनीति और राजनीतिक समीकरणों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।


