मुंबई वार्ता संवाददाता

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए छह सांसदों ने अपने निर्वाचन क्षेत्रों के विकास के लिए पर्याप्त निधि नहीं मिलने का आरोप लगाया था। हालांकि, अब इन सांसदों के पिछले दो वर्षों के कामकाज और खर्च का ब्यौरा सामने आने के बाद उनके दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं।


शिंदे गुट में शामिल हुए सांसदों का कहना था कि विकास कार्यों के लिए धन नहीं मिलने के कारण जनता से किए गए वादे पूरे नहीं हो पा रहे थे। इसी वजह से उन्होंने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ने का फैसला किया। लेकिन अब सामने आए आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सांसद संजय देशमुख को 18 करोड़ 6 लाख रुपये की निधि मंजूर हुई थी, लेकिन उन्होंने अब तक केवल 1 करोड़ 42 लाख रुपये ही खर्च किए हैं। 106 मंजूर कार्यों में से सिर्फ 7 कार्य पूरे हुए हैं।
सांसद संजय दिना पाटिल को 14 करोड़ 70 लाख रुपये की मंजूरी मिली थी, लेकिन उन्होंने केवल 15 लाख रुपये खर्च किए और 40 में से एक भी कार्य पूरा नहीं कर पाए।
वहीं, ओमराजे निंबालकर को 18 करोड़ 50 लाख रुपये की निधि मिली थी, लेकिन उन्होंने सिर्फ 1 करोड़ 97 लाख रुपये खर्च किए। उनके 130 मंजूर कार्यों में से केवल 21 कार्य पूरे हुए हैं।
संजय उर्फ बंडू जाधव को 14 करोड़ 70 लाख रुपये की निधि मंजूर हुई थी, जिसमें से 3 करोड़ 78 लाख रुपये खर्च किए गए। 56 कार्यों में से 25 पूरे हुए हैं।
नागेश पाटील आष्टीकर को 19 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली थी। उन्होंने 5 करोड़ 6 लाख रुपये खर्च किए और 79 में से 28 कार्य पूरे किए।
भाऊसाहेब वाकचौरे को 14 करोड़ 7 लाख रुपये की निधि मिली, लेकिन खर्च मात्र 71 लाख रुपये का हुआ। उनके 135 मंजूर कार्यों में से केवल दो कार्य पूरे हो सके।
इन छह सांसदों ने हाल ही में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में प्रवेश किया था और दावा किया था कि विकास कार्यों के लिए धन नहीं मिलने के कारण उन्हें यह निर्णय लेना पड़ा। लेकिन दो वर्षों के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि मंजूर की गई निधि का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं किया गया और कई परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। ऐसे में विकास निधि को लेकर दिए गए उनके तर्कों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।


