महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: खेती के लिए मिट्टी-मुरूम पर रॉयल्टी खत्म, किसानों को नहीं रोका जाएगा।

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मुंबई वार्ता संवाददाता


महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए खेती से जुड़े कार्यों के लिए मिट्टी, गाद (गाळ) और मुरूम जैसे गौण खनिजों पर लगने वाली रॉयल्टी (स्वामित्व शुल्क) पूरी तरह समाप्त कर दी है। अब किसान अपनी जमीन के विकास, कुआं, पशुशाला (गोठा) या खेतघर के निर्माण के लिए इन सामग्रियों का उपयोग बिना किसी रॉयल्टी के कर सकेंगे। इस संबंध में राज्य सरकार ने शासन निर्णय (जीआर) भी जारी कर दिया है।


राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने गुरुवार को विधानसभा और विधान परिषद में यह घोषणा करते हुए कहा कि यदि कोई पुलिस या राजस्व अधिकारी किसानों के ट्रैक्टर, ट्रक या बैलगाड़ी को रोककर अनावश्यक कार्रवाई करता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल किसानों के व्यक्तिगत और कृषि उपयोग के लिए लागू होगा तथा इसका व्यावसायिक उपयोग करने वालों पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।


यह निर्णय विभिन्न विधायकों द्वारा लगातार उठाई गई मांगों के बाद लिया गया। सरकार का कहना है कि राज्य की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है और इस फैसले से ग्रामीण विकास तथा कृषि सुधार को गति मिलेगी।
नई व्यवस्था के तहत किसान जलसंपदा एवं मृदा एवं जल संरक्षण विभाग के अंतर्गत आने वाले जलाशयों, गांव तालाबों, खेत तालाबों, नालों, बंधारों, छोटे सिंचाई तालाबों तथा अपनी कृषि भूमि से गाद, मिट्टी और मुरूम निकाल सकेंगे। इनका उपयोग खेतों में जमा कीचड़ हटाने, खेत मार्गों के गड्ढे भरने, कुएं खोदने, पशुशाला और खेतघर के निर्माण या मरम्मत जैसे कार्यों में किया जा सकेगा।


सरकार ने अनुमति प्रक्रिया को भी आसान बनाया है। किसान को केवल स्थानीय तलाठी के पास एक साधारण आवेदन देना होगा। संबंधित मंडल अधिकारी के लिए 15 दिनों के भीतर अनुमति देना अनिवार्य होगा। यदि सामग्री जलसंपदा विभाग के अधीन किसी तालाब या नाले से ली जानी है तो संबंधित विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) आवश्यक होगा, जबकि राजस्व विभाग के नालों के मामले में तहसीलदार की अनुमति लेनी होगी।


राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने कहा कि किसानों द्वारा अपने उपयोग के लिए मिट्टी या मुरूम ले जाने पर किसी भी वाहन को जब्त नहीं किया जाएगा और न ही उन पर कोई दंडात्मक कार्रवाई होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई अधिकारी किसानों को अनावश्यक रूप से परेशान करता है तो उसके खिलाफ सरकार कठोर कार्रवाई करेगी।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस सुविधा का व्यावसायिक उपयोग करने वालों पर प्रचलित कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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