मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राऊत के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। राउत ने दावा किया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है और उनके स्थान पर महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एकनाथ शिंदे के दोबारा मुख्यमंत्री बनने की कोई संभावना नहीं है।


राऊत के इस बयान के बाद राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पिछले कुछ दिनों से केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाएं जताई जा रही हैं। इसी के साथ कई राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। ऐसे में महाराष्ट्र को लेकर भी राजनीतिक कयासों का दौर शुरू हो गया है।
हालांकि, महायुति सरकार की ओर से इन अटकलों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा नेतृत्व ने चंद्रशेखर बावनकुळे के मुख्यमंत्री बनने की संभावना पर कोई टिप्पणी नहीं की है। दूसरी ओर, स्वयं चंद्रशेखर बावनकुळे पहले ही कह चुके हैं कि देवेंद्र फडणवीस वर्ष 2034 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। ऐसे में फिलहाल यह पूरा मामला राजनीतिक दावों और प्रतिदावों तक ही सीमित है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार के बाद ही इन चर्चाओं की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व क्या फैसला करता है और महायुति के भीतर किस तरह का राजनीतिक संतुलन बनाया जाता है, इसी पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।
संजय राऊत के बयान को विपक्ष की एक राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि उन्होंने महायुति के नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े कर सत्ताधारी गठबंधन पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की है। वहीं, कुछ राजनीतिक हलकों में देवेंद्र फडणवीस के भविष्य में राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने और उन्हें प्रधानमंत्री पद के संभावित दावेदार के रूप में देखे जाने जैसी चर्चाएं भी चल रही हैं। हालांकि, महायुति के नेताओं ने इन सभी अटकलों को फिलहाल गंभीरता से नहीं लिया है।
अब सबकी नजर केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार पर टिकी है। महाराष्ट्र को केंद्र में कितना प्रतिनिधित्व मिलता है और उसके बाद राज्य के नेतृत्व में वास्तव में कोई बदलाव होता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल संजय राउत के बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।


