मुंबई वार्ता संवाददाता

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्याध्यक्ष एवं सांसद सुप्रिया सुले ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी ने आगामी संसद के मानसून सत्र में प्रस्तावित परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि मीडिया में चल रही खबरें केवल सूत्रों के हवाले से हैं और पार्टी की आधिकारिक राय नहीं हैं।


मुंबई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि पार्टी की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। मीडिया में आई खबरों से कार्यकर्ताओं और महाविकास आघाड़ी में भ्रम की स्थिति पैदा हुई, इसलिए उन्होंने पार्टी अध्यक्ष शरद पवार, जयंत पाटिल, प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे तथा पार्टी के सांसदों और विधायकों से चर्चा के बाद स्थिति स्पष्ट करने का फैसला किया।
सुले ने बताया कि उन्होंने बुधवार सुबह कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, सतेज पाटिल और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के नेता संजय राऊत से भी इस मुद्दे पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि अभी तक सरकार की ओर से परिसीमन विधेयक का कोई लिखित प्रस्ताव नहीं मिला है, इसलिए पार्टी फिलहाल उस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं कर सकती। हालांकि, प्रस्ताव मिलने के 24 घंटे के भीतर पार्टी अपना स्पष्ट रुख सामने रखेगी।
उन्होंने बताया कि महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उन्हें, शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के सांसद अरविंद सावंत और एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी को चर्चा के लिए बुलाया था, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। उस बैठक में दक्षिण भारत के राज्यों ने आबादी के आधार पर होने वाले परिसीमन पर आपत्ति जताई थी और आशंका व्यक्त की थी कि इससे उनके साथ अन्याय होगा।
सुप्रिया सुले ने कहा कि चर्चा के दौरान यह सुझाव दिया गया था कि देश के सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ाई जाए। उन्होंने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि राज्य की वर्तमान 48 लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि होती है, तो महाराष्ट्र की सीटें बढ़कर 72 हो जाएंगी। इसके बाद अनुसूचित जाति-जनजाति और महिलाओं के आरक्षण के प्रावधान लागू किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि यदि पूरे देश में समान रूप से 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव आता है, तो उस पर विचार किया जा सकता है। लेकिन ऐसा कोई भी निर्णय इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों से चर्चा के बाद ही लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को अलग-अलग दलों से राय लेने के बजाय सभी विपक्षी दलों से सामूहिक रूप से चर्चा करनी चाहिए।
सुप्रिया सुले ने दावा किया कि बाद में जब सरकार का मसौदा सामने आया तो उसमें 50 प्रतिशत सीट वृद्धि का कोई उल्लेख नहीं था। उन्होंने कहा कि इस कारण पार्टी को आश्चर्य हुआ और फिलहाल इस विषय पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने दोहराया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने परिसीमन विधेयक को लेकर अभी तक किसी भी समाचार चैनल या अखबार के माध्यम से कोई आधिकारिक समर्थन या विरोध व्यक्त नहीं किया है।


