श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई की विशेष अदालत ने 2023 में एक सरकारी कर्मचारी के साथ कथित मारपीट, धमकी और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के मामले में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता एवं विधान परिषद सदस्य अनिल परब समेत सभी 11 आरोपियों को बरी कर दिया।


सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाले विशेष न्यायाधीश महेश जाधव ने गुरुवार को सभी आरोपियों को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना वर्ष 2023 में मुंबई के सांताक्रूज़ (पूर्व) स्थित बीएमसी कार्यालय में हुई थी, जहां अनिल परब के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल बैठक के लिए पहुंचा था। आरोप था कि परब ने अन्य आरोपियों को सरकारी कर्मचारी के साथ मारपीट करने और उन्हें धमकाने के लिए उकसाया तथा उनका सहयोग किया।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत सरकारी कर्मचारी के साथ मारपीट, आपराधिक बल प्रयोग, सरकारी कार्य में बाधा डालने और ड्यूटी के दौरान धमकाने के आरोप में मामला दर्ज किया था। अभियोजन का दावा था कि यह हमला सरकारी कर्मचारी को अपने वैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने के उद्देश्य से किया गया था।
मामले की सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करते हुए अनिल परब सहित सभी 11 आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। इस फैसले के साथ ही इस आपराधिक मामले की कार्यवाही समाप्त हो गई। अदालत के विस्तृत फैसले की प्रति उपलब्ध होने के बाद बरी किए जाने के कारण स्पष्ट होंगे।


