मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में अवैध और जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने के उद्देश्य से बनाए गए महाराष्ट्र धर्मस्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद राज्य में यह कानून आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद कानून का राजपत्र में प्रकाशन कर दिया गया, जिसके साथ ही इसकी सभी धाराएं प्रभावी हो गई हैं।


यह कानून बलपूर्वक, धोखाधड़ी, प्रलोभन, झूठी जानकारी या विवाह का झांसा देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण को अपराध घोषित करता है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। वहीं, दोबारा अपराध करने वालों के लिए सजा 10 वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है।
कानून के तहत किसी भी धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया के लिए निर्धारित कानूनी नियमों का पालन करना होगा। यदि धर्मांतरण जबरन, लालच या छल से कराया गया पाया जाता है तो संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।
यह विधेयक महाराष्ट्र विधानमंडल के बजट सत्र में पारित होने के बाद राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया था। अब राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून पूरे राज्य में लागू हो गया है।
राज्य सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए अवैध धर्मांतरण की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाना है।


