मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र सरकार द्वारा ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का मूलभूत ज्ञान अनिवार्य करने के फैसले पर अब सख्ती के संकेत मिल रहे हैं। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट किया है कि 15 अगस्त के बाद प्रशिक्षण की समयसीमा बढ़ाए जाने की संभावना नहीं है। 18 अगस्त से मराठी का बुनियादी ज्ञान नहीं रखने वाले अथवा प्रशिक्षण पूरा नहीं करने वाले चालकों के खिलाफ विशेष टीमों द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।


राज्य सरकार ने अमराठी ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए 15 अगस्त तक मराठी सीखना अनिवार्य किया है। इस फैसले के बाद पूरे महाराष्ट्र में मराठी भाषा प्रशिक्षण अभियान को अच्छा प्रतिसाद मिला। कोकण मराठी साहित्य परिषद के सहयोग से राज्य के 36 में से 32 जिलों में प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए गए हैं। इनमें मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र से सबसे अधिक चालक प्रशिक्षण के लिए सामने आए हैं। अब तक करीब 98 हजार चालकों का प्रशिक्षण अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
चालकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पहले तैयार किए गए लगभग 200 पन्नों के विस्तृत पाठ्यक्रम की जगह केवल दो पन्नों का सरल और व्यवहारिक पाठ्यक्रम तैयार किया गया। प्रशिक्षकों ने चालकों के कार्य समय को देखते हुए उनके विश्राम स्थलों पर जाकर प्रशिक्षण दिया। इस अभियान में कोकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ के लगभग 1,600 से 1,700 प्राध्यापक, साहित्यकार और स्वयंसेवक शामिल हैं।हालांकि कई चालक संगठनों ने प्रशिक्षण पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग की है, लेकिन सरकार का कहना है कि पर्याप्त समय और अवसर पहले ही दिए जा चुके हैं। इसलिए समयसीमा बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
मराठी भाषा प्रशिक्षण अभियान का औपचारिक समापन 17 अगस्त को ठाणे के गडकरी रंगायतन में होगा। इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उद्योग एवं भाषा मंत्री उदय सामंत शामिल होंगे। अभियान में योगदान देने वाली संस्थाओं और स्वयंसेवकों का सम्मान भी किया जाएगा।इसके बाद 18 अगस्त से विशेष जांच दल सक्रिय किए जाएंगे और जिन चालकों को मराठी का मूलभूत ज्ञान नहीं होगा या जिन्होंने प्रशिक्षण पूरा नहीं किया होगा, उनके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि चालकों को मराठी सीखने के लिए पर्याप्त समय और अवसर दिए गए हैं, इसलिए 15 अगस्त के बाद किसी प्रकार की समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। वहीं, महाराष्ट्र राज्य साहित्य एवं संस्कृति मंडल के उपाध्यक्ष तथा कोकण मराठी साहित्य परिषद के कार्याध्यक्ष प्रदीप ढवळ ने बताया कि अभियान की शुरुआत 1 जून से हुई थी। शुरुआत में प्रतिक्रिया सीमित थी, लेकिन जागरूकता बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में चालक स्वयं मराठी सीखने के लिए आगे आए।
उन्होंने बताया कि फिलहाल राज्यभर में 140 से अधिक प्रशिक्षण केंद्र संचालित हो रहे हैं। चालकों की कठिन लिखित परीक्षा नहीं ली जाएगी, बल्कि केवल मौखिक परीक्षा होगी। इसमें सफल होने वाले चालकों को प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जो भविष्य में ड्राइविंग लाइसेंस, परमिट और बैज के नवीनीकरण में उपयोगी होगा।


