■ SMPA योजना में बदलाव के बाद नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी; घर-घर कचरा संग्रह और गलियों की सफाई पर रहेगा फोकस, GPS ऐप व QR कोड से होगी निगरानी
मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई की झुग्गी-बस्तियों, घनी आबादी और सघन बस्तियों में सफाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वर्ष 2013 से लागू ‘स्वच्छ मुंबई प्रबोधन अभियान’ (SMPA) की समीक्षा के बाद अब इसके स्थान पर आधुनिक तकनीक और बेहतर आर्थिक प्रावधानों से युक्त ‘बृहन्मुंबई स्वच्छता सेवा योजना’ लागू करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। मंगलवार को महापौर रितू तावडे की अध्यक्षता में हुई गुटनेताओं की बैठक में इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई।


■ 2013 से चल रही योजना में सामने आईं कई कमियां
SMPA के तहत झुग्गी-बस्तियों में आंतरिक गलियों और पगडंडियों की सफाई, घर-घर जाकर कचरा संग्रह, सार्वजनिक कचरा केंद्रों की सफाई, 20 फुट तक चौड़ी आंतरिक सड़कों की सफाई, शौचालयों की सफाई, आंतरिक नालियों की सफाई तथा स्वच्छता को लेकर जनजागरूकता जैसे काम किए जाते हैं।


हालांकि, BMC के अनुसार मौजूदा व्यवस्था में संस्थाओं को कई तरह के अलग-अलग काम सौंपे जाने के कारण कर्मचारियों पर विविध कार्यों का बोझ पड़ता है, जिससे सफाई की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसके अलावा 2013 से संस्थाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
खुले और बंद नालों तथा आंतरिक गटरों की सफाई के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों और विशेष उपकरणों की आवश्यकता होती है। ऐसे तकनीकी कार्यों को SMPA के माध्यम से कराना व्यावहारिक नहीं माना गया है।
■ नई योजना में काम का स्पष्ट विभाजन
इन समस्याओं को दूर करने के लिए तैयार की गई नई ‘बृहन्मुंबई स्वच्छता सेवा योजना’ में संस्थाओं की जिम्मेदारियां स्पष्ट की जाएंगी। संबंधित संस्थाओं का मुख्य ध्यान केवल दैनिक घरेलू कचरा संग्रह और आंतरिक गलियों की झाड़ू-सफाई पर रहेगा।
नालों और गटरों की सफाई के लिए विभाग स्तर पर अलग तकनीकी कर्मचारियों की व्यवस्था की जाएगी। वहीं, सार्वजनिक शौचालयों के प्रबंधन की जिम्मेदारी कम्युनिटी बेस्ड ऑर्गनाइजेशन (CBO) को अलग से दी जाएगी।
■ आर्थिक सहायता 6 हजार से बढ़कर 11 हजार रुपये
नई योजना के तहत संस्थाओं को मिलने वाली मासिक आर्थिक सहायता में भी बड़ा बदलाव किया जाएगा। वर्तमान में प्रति यूनिट मिलने वाली 6,000 रुपये की मासिक सहायता बढ़ाकर 11,000 रुपये करने का प्रस्ताव है।
BMC का कहना है कि इससे जमीनी स्तर पर काम करने वाली संस्थाओं को पर्याप्त आर्थिक सहयोग मिलेगा और सफाई व्यवस्था को मजबूत करने में मदद होगी।
■ GPS से होगी रियल टाइम निगरानी
नई योजना में आधुनिक तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा। सफाई कार्यों की रियल टाइम निगरानी के लिए GPS आधारित मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसके अलावा नागरिकों को सीधे शिकायत दर्ज कराने के लिए QR कोड आधारित डिजिटल सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे नागरिकों की भागीदारी बढ़ने के साथ सफाई व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
■ लापरवाही पर जुर्माना, तीन बार गलती पर ब्लैकलिस्ट
नई व्यवस्था में लापरवाही करने वाली संस्थाओं पर कार्रवाई का भी प्रावधान रखा गया है। यदि दंडनीय लापरवाही लगातार तीन बार दोहराई जाती है, तो संबंधित संस्था को ब्लैकलिस्ट किया जा सकेगा।
वहीं, बेहतर प्रदर्शन करने वाली संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए हर महीने 21,000 रुपये का अतिरिक्त प्रोत्साहन अनुदान देने का प्रस्ताव है।
महापौर ने सभी नगरसेवकों के सुझाव शामिल करने के दिए निर्देश
महापौर रितू तावडे की अध्यक्षता में मंगलवार शाम BMC मुख्यालय स्थित महापौर कक्ष में गुटनेताओं की बैठक हुई। बैठक में सभागृह नेता गणेश खणकर, विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर, स्थायी समिति अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे, BMC आयुक्त अश्विनी भिडे सहित विभिन्न दलों के गुटनेता और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में नई स्वच्छता योजना पर विस्तार से चर्चा हुई। महापौर ने निर्देश दिया कि बैठक में सामने आए महत्वपूर्ण सुझावों को नीति के मसौदे में शामिल किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्ताव को स्थायी समिति और बाद में महानगरपालिका की सभा के समक्ष प्रस्तुत करते समय सभी नगरसेवकों के सुझावों को उचित रूप से शामिल किया जाए।
BMC का मानना है कि नई योजना प्रशासनिक और आर्थिक रूप से अधिक प्रभावी होने के साथ नागरिक-केंद्रित होगी और मुंबई की घनी बस्तियों में स्वच्छता व्यवस्था को नई दिशा देगी।


