मुंबई में पथ विक्रेता योजना लागू करने की तैयारी तेज, 31 अगस्त तक QR पहचान-पत्र वितरण; महापौर रितू तावडे के निर्देश।

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श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता


महाराष्ट्र सरकार द्वारा पथ विक्रेता योजना की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद उसका तत्काल क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए बीएमसी प्रशासन ने विभाग स्तर पर प्राथमिक तैयारियां तेज करने की दिशा में कदम उठाए हैं। मुंबई की महापौर रितू तावडे ने निर्देश दिया है कि योजना लागू होने के समय किसी तरह की अफरा-तफरी न हो, इसके लिए सभी जरूरी तैयारियां पहले से पूरी की जाएं।


महापौर रितू तावडे ने शुक्रवार को बीएमसी मुख्यालय स्थित महापौर कक्ष में मुंबई के पथ विक्रेताओं (फेरीवालों) की नीति और उससे संबंधित कामकाज की समीक्षा की। इस दौरान अतिरिक्त नगर आयुक्त (पश्चिमी उपनगर) डॉ. विपिन शर्मा, उपनगर आयुक्त (विशेष) विनायक विसपुते, उपनगर आयुक्त चंदा जाधव, विश्वास मोटे, संतोषकुमार धोंडे, मनीष वळंजू और लाइसेंस अधीक्षक अनिल काटे सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।


153 आवेदन समितियों के गैर-सरकारी सदस्यों के लिए बैठक में प्रशासन की ओर से पथ विक्रेता नीति और अब तक की कार्रवाई की जानकारी दी गई। पथ विक्रेता समितियों के गैर-सरकारी सदस्यों के लिए कुल 153 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें गैर-सरकारी एवं सामुदायिक संगठनों से 107, निवासी कल्याण संघों से 27 और व्यापारी संघों के प्रतिनिधि वर्ग से 19 आवेदन शामिल हैं। सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

■ 99,435 पथ विक्रेताओं का सर्वेक्षण


बीएमसी के पथ विक्रेता सर्वेक्षण में पंजीकृत 99,435 पथ विक्रेताओं में से अब तक 57,697 को QR कोड आधारित पहचान-पत्र जारी किए जा चुके हैं।
जांच के दौरान 3,950 आवेदक मृत पाए गए, जबकि 37,788 लोग संपर्क किए जाने के बावजूद कार्यालय नहीं पहुंचे अथवा उनसे संपर्क नहीं हो सका। बीएमसी ने QR कोड आधारित पहचान-पत्र वितरण की समय सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 तक कर दी है। इसके बाद आने वाले पथ विक्रेताओं को QR कोड आधारित पहचान-पत्र जारी नहीं किया जाएगा।
प्रशासन के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा पथ विक्रेता योजना की अधिसूचना जारी होने के बाद योजना को वास्तविक रूप से लागू किया जाएगा।

■ बिक्री क्षेत्र तय करने का काम तेज करने के निर्देश


महापौर ने पथ विक्रेता समिति और सात परिमंडलीय नगर पथ विक्रेता समितियों का काम निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजना मंजूर होकर अधिसूचित होने के बाद इसे तत्काल लागू किया जाना चाहिए।


उन्होंने सभी प्रशासनिक विभागों में पथ विक्रेताओं के लिए बिक्री क्षेत्र निर्धारित करने की प्राथमिक प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए, ताकि अंतिम समय में प्रशासन को जल्दबाजी न करनी पड़े। साथ ही अनधिकृत पथ विक्रेताओं के खिलाफ शिकायत करने के लिए उपलब्ध व्यवस्था की व्यापक जनजागरूकता करने को भी कहा।


■ अस्पताल, स्कूल और रेलवे प्रवेश मार्गों पर अतिक्रमण नहीं


महापौर ने स्पष्ट किया कि बिक्री क्षेत्र तय करते समय नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। अस्पतालों, स्कूल-कॉलेजों के प्रवेश द्वार, रेलवे स्टेशनों के आने-जाने के मार्ग, अग्निशमन केंद्रों, धार्मिक स्थलों के प्रवेश द्वार, संकरे फुटपाथ, यातायात जाम वाले स्थानों, बस स्टॉप और आपातकालीन मार्गों पर पथ विक्रेताओं के कारण किसी तरह की बाधा नहीं होनी चाहिए।


उन्होंने पथ विक्रेताओं की संख्या और उपलब्ध क्षेत्र के बीच उचित संतुलन बनाए रखने तथा पेयजल, कूड़ेदान और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।


डुप्लीकेट पंजीकरण रोकने और शिकायत व्यवस्था बनाने पर जोर
महापौर ने निर्देश दिया कि किसी एक पथ विक्रेता का दोहरा या उससे अधिक बार पंजीकरण न हो। पथ विक्रेताओं और नागरिकों को अपनी शिकायतें एवं सुझाव दर्ज कराने के लिए उचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।


इसके अलावा पथ विक्रेताओं को आवंटित स्थान और उनके काम करने के समय की जानकारी नागरिकों को आसानी से उपलब्ध हो, यह सुनिश्चित करने को कहा गया।


महापौर ने पथ विक्रेता समितियों की हर महीने अथवा निर्धारित अंतराल पर बैठक लेकर कामकाज की समीक्षा करने और योजना को अधिक पारदर्शी, तेज और सुविधाजनक बनाने के लिए तकनीक का अधिकतम उपयोग करने का भी निर्देश दिया।


अतिरिक्त नगर आयुक्त डॉ. विपिन शर्मा ने आश्वासन दिया कि पथ विक्रेता योजना के क्रियान्वयन के समय महापौर द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का अध्ययन कर उनका उचित रूप से पालन किया जाएगा।

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