विदेशी फंडिंग के नियमों में बदलाव का विरोध नहीं, लेकिन सामाजिक संस्थाओं के लिए रास्ते बंद करना मंजूर नहीं: सुप्रिया सुले।

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मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष एवं सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि विदेशी फंडिंग के नियमों में सुधार करने का उनकी पार्टी विरोध नहीं करती, लेकिन शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं को मिलने वाले वैध विदेशी फंड पर अनावश्यक रोक लगाना स्वीकार्य नहीं है।


मुंबई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि कई स्वयंसेवी संस्थाएं पोलियो टीकाकरण, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा गरीब और मेहनतकश परिवारों के कल्याण के लिए काम करती हैं। ऐसी संस्थाओं को विदेश से मिलने वाली वैध आर्थिक मदद को संदेह की नजर से देखना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि विदेश से आने वाला पैसा अवैध है या ‘डर्टी मनी’ है, तो सरकार को उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन अच्छे काम में लगी संस्थाओं के लिए विदेशी फंड हासिल करने में बाधा पैदा करना उचित नहीं होगा।

सुले ने कहा कि सरकार को जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेना चाहिए और संबंधित विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजकर उस पर विस्तृत चर्चा करनी चाहिए।
राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना में हुई टूट लोकतंत्र के लिए घातक
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना में हुई टूट पर सुप्रिया सुले ने कहा कि जिस तरह दोनों दलों को विभाजित किया गया, वह गलत है और संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है।


उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सहित विभिन्न संस्थाओं का जिस तरह से इस्तेमाल किया गया, वह लोकतंत्र के लिए घातक है। सुले ने कहा कि उनके विरोधियों को भी पता है कि जिस तरीके से ये घटनाएं हुईं, वह उचित नहीं था।

■ ‘शिवसेना उद्धव ठाकरे की ही है’


शिवसेना को लेकर पूछे गए सवाल पर सुप्रिया सुले ने कहा कि शिवसेना कल भी उद्धव ठाकरे की थी, आज भी है और भविष्य में भी उन्हीं की रहेगी।
उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे ने शिवसेना की स्थापना की थी और उनके जीवनकाल में उन्होंने पार्टी की जिम्मेदारी उद्धव ठाकरे को सौंपी थी। सुले ने कहा कि यदि किसी को अलग विचार के साथ अपनी राजनीतिक राह बनानी थी, तो वह राज ठाकरे की तरह अलग पार्टी खड़ी कर सकता था।
उन्होंने कहा कि अपने दम पर राजनीतिक दल खड़ा करना निश्चित रूप से सराहनीय है और किसी को ऐसा करने से रोका नहीं गया था।

■ ‘राष्ट्रवादी कांग्रेस शरद पवार साहेब की थी, है और रहेगी’


राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को लेकर सुप्रिया सुले ने कहा कि शरद पवार पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के संविधान में सांसदों और विधायकों के मतदान के आधार पर पार्टी के स्वामित्व का प्रावधान नहीं है, बल्कि पार्टी जिसके पास है, उसी के पास रहने का प्रावधान है।


सुले ने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरद पवार की थी, आज भी है और आगे भी रहेगी। इस संबंध में उनकी ओर से सभी आवश्यक दस्तावेज और सबूत अदालत में पेश किए गए हैं।


उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के फैसले से उनकी पार्टी के साथ अन्याय हुआ। सुले ने कहा कि उन्हें संवैधानिक संस्थाओं की आलोचना करना पसंद नहीं है, लेकिन भारी मन से कहना पड़ता है कि चुनाव आयोग ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मामले में गलत तरीके से फैसला किया।

■ आश्रमशालाओं की तत्काल समीक्षा की मांग


सुप्रिया सुले ने पुरानी आश्रमशालाओं की समितियों की रिपोर्ट मंगाकर इस मुद्दे पर तत्काल बैठक बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले के जिलाधिकारी को इसकी जिम्मेदारी दी जानी चाहिए और एक महीने के भीतर समीक्षा रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए जाने चाहिए।


उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में सभी दलों के जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए। बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य का मुद्दा राजनीति से दूर रखकर गंभीरता से हल किया जाना चाहिए।


■ चाकण में रोजगार के मुद्दे पर सरकार को घेरा


चाकण के मुद्दे पर सुप्रिया सुले ने कहा कि शरद पवार ने चाकण में एमआईडीसी स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘डबल इंजन सरकार’ के कार्यकाल में वहां की स्थिति चिंताजनक है।


उन्होंने कहा कि जब गरीब बच्चों और युवाओं की नौकरियां जा रही हैं, तब सरकार को उनकी चिंता करनी चाहिए। सुले ने सरकार पर तंज कसते हुए सवाल किया कि जब चार्टर विमान से नासिक जाना संभव है, तो चाकण जाने में परेशानी क्यों हो रही है।


सुप्रिया सुले ने कहा कि रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर जनता के हित में निर्णय लेने चाहिए।

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