मुंबई में अब क्यूआर कोड वाले रिफ्लेक्टिव कॉलर से होगी आवारा कुत्तों की डिजिटल पहचान, रेबीजमुक्त शहर की दिशा में बीएमसी का कदम।

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मुंबई वार्ता संवाददाता


बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन और रेबीज नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए क्यूआर कोडयुक्त रिफ्लेक्टिव कॉलर इस्तेमाल करने की तकनीक आधारित पहल शुरू की है। इन कॉलर की मदद से रेबीज रोधी टीकाकरण और नसबंदी किए गए आवारा कुत्तों की मौके पर पहचान करने के साथ-साथ उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना और ट्रैकिंग भी आसान होगा।


इस पहल के तहत बीएमसी और रिडलान एआई फाउंडेशन के बीच गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को बीएमसी मुख्यालय में समझौता किया गया। इस अवसर पर उपायुक्त (विशेष) विनायक विसपुते, पशु चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख डॉ. कलीमपाशा पठाण, रिडलान एआई फाउंडेशन के अक्षय रिडलान सहित पशु चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे।

■ 2030 तक मुंबई को रेबीजमुक्त बनाने का लक्ष्य


बीएमसी प्रशासन के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और पशु कल्याण के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे के मार्गदर्शन और अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) प्राजक्ता वर्मा-लवंगारे के नेतृत्व में आवारा कुत्तों का प्रबंधन, पशु जन्म नियंत्रण (ABC) तथा रेबीज प्रतिबंधक उपायों पर काम किया जा रहा है।


मुंबई को वर्ष 2030 तक रेबीजमुक्त बनाने के व्यापक लक्ष्य के तहत बीएमसी अब तकनीक और डिजिटल सूचना प्रणाली के जरिए जमीनी स्तर पर निगरानी एवं प्रबंधन को मजबूत कर रही है।

■ रंगीन स्याही की जगह अब डिजिटल पहचान


बीएमसी हर वर्ष आवारा कुत्तों के लिए बड़े पैमाने पर रेबीज रोधी टीकाकरण अभियान चलाती है। अब तक टीकाकरण किए गए कुत्तों की पहचान के लिए रंगीन स्याही या अन्य अस्थायी निशानों का इस्तेमाल किया जाता था। समय के साथ ये निशान फीके पड़ जाने या मिट जाने के कारण कुत्तों की दीर्घकालिक पहचान और निगरानी में परेशानी आती थी।


क्यूआर कोडयुक्त रिफ्लेक्टिव कॉलर से यह समस्या दूर होने की उम्मीद है। टीकाकरण और नसबंदी किए गए कुत्तों की पहचान अब अधिक टिकाऊ, व्यवस्थित और तकनीक आधारित तरीके से की जा सकेगी।
क्यूआर टैग से उपलब्ध होगा रिकॉर्ड


बीएमसी के अनुसार, निर्धारित डेटा एक्सेस प्रोटोकॉल के तहत क्यूआर टैग के माध्यम से संबंधित कुत्ते की दर्ज जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। इससे उसके टीकाकरण, नसबंदी और स्वास्थ्य संबंधी उपायों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।


डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से यह भी पता लगाने में मदद मिलेगी कि किसी कुत्ते का पहले टीकाकरण या नसबंदी हो चुकी है या नहीं। इससे एक ही कुत्ते पर बार-बार अनावश्यक हस्तक्षेप को रोकने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।


बीएमसी और पशु कल्याण संस्थाओं के बीच समन्वय होगा मजबूत
बीएमसी का कहना है कि डिजिटल प्रणाली तथ्य आधारित योजना बनाने, क्षेत्रीय निगरानी को प्रभावी करने और बीएमसी, पशु कल्याण संस्थाओं, पशु चिकित्सा टीमों तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने में मददगार होगी।


भविष्य में इस डिजिटल डेटाबेस से मुंबई में रेबीज उन्मूलन की दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे।

■ सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण पहल


बीएमसी के अनुसार, टीकाकरण और नसबंदी के कवरेज से संबंधित विश्वसनीय एवं अद्यतन जानकारी मिलने से कमियों की पहचान और आवश्यक फॉलोअप कार्रवाई करना आसान होगा। इससे रेबीज उन्मूलन के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।


महानगरपालिका प्रशासन का कहना है कि यह पहल पशु कल्याण और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में सहायक होगी। इसका अंतिम उद्देश्य आवारा कुत्तों से फैलने वाले रेबीज के कारण होने वाली मानव मौतों को कम करना और मुंबई को रेबीजमुक्त बनाने के प्रयासों को गति देना है।

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