मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई के खुले मैदानों, खेल के मैदानों और सार्वजनिक जगहों के कथित व्यावसायीकरण के विरोध में शिवसेना (यूबीटी) नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने 23 अगस्त को आंदोलन का ऐलान किया है। यह प्रदर्शन रविवार शाम 5 बजे बांद्रा पश्चिम स्थित नेविल डिसूजा फुटबॉल टर्फ, रंगशारदा के सामने आयोजित किया जाएगा। ठाकरे ने मुंबईकरों से राजनीतिक दल और विचारधारा से ऊपर उठकर आंदोलन में शामिल होने तथा तिरंगा लेकर पहुंचने की अपील की है।


आदित्य ठाकरे का आरोप है कि मुंबई की बची हुई खुली जगहों, मैदानों और खेल परिसरों को विभिन्न प्रस्तावों के जरिए व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि इन जगहों का संरक्षण मुंबईकरों के हित में जरूरी है।
■ नेविल डिसूजा मैदान को लेकर विवाद
आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बांद्रा स्थित नेविल डिसूजा फुटबॉल ग्राउंड है। बीएमसी की आमसभा ने इस मैदान का आरक्षण खेल मैदान से बदलकर कन्वेंशन और एग्जिबिशन सेंटर करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस फैसले का मुंबई फुटबॉल एसोसिएशन, फुटबॉल खिलाड़ियों, क्लबों और स्थानीय नागरिकों की ओर से विरोध किया जा रहा है। इस मैदान का इस्तेमाल करीब 8,000 खिलाड़ी करते हैं।
आदित्य ठाकरे ने बीएमसी के फैसले को मुंबई के घटते खुले स्थानों के लिए गंभीर खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि शहर में पहले ही सार्वजनिक और खेल के मैदान सीमित हैं, ऐसे में मौजूदा मैदानों को व्यावसायिक उपयोग में बदलना उचित नहीं है।
■ कई अन्य भूखंडों को लेकर भी सवाल
खुले मैदानों को लेकर विवाद केवल नेविल डिसूजा मैदान तक सीमित नहीं है। विपक्षी दलों ने बीएमसी और अन्य सरकारी एजेंसियों पर सार्वजनिक जमीनों को निजी संस्थाओं को देने या पीपीपी मॉडल के तहत व्यावसायिक इस्तेमाल की अनुमति देने के आरोप लगाए हैं। बीएमसी की बैठकों में खुले भूखंडों, स्कूलों, उद्यानों और खेल मैदानों के इस्तेमाल को लेकर भी विपक्ष ने आपत्ति जताई है।
जुहू और अंधेरी के कुछ भूखंडों को लेकर भी विवाद चल रहा है। इन जमीनों के आवंटन का आदित्य ठाकरे और स्थानीय नागरिक समूहों ने विरोध किया है तथा इन्हें सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखने की मांग की है।
■ ‘मुंबईकर बनकर मैदान बचाने आएं’
आदित्य ठाकरे ने मुंबईकरों से अपील की है कि 23 अगस्त के आंदोलन में किसी पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि ‘मुंबईकर’ और खेलप्रेमी के तौर पर शामिल हों। उन्होंने तिरंगा लेकर आंदोलन में पहुंचने का आह्वान किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई की खुली जगहों का निजीकरण या व्यावसायीकरण शहर के नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित करेगा। शिवसेना (यूबीटी) ने स्पष्ट किया है कि वह इन मैदानों और खुले भूखंडों को बचाने के लिए आंदोलन जारी रखेगी।


