मुंबई वार्ता संवाददाता

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एंटीलिया विस्फोटक मामले और मनसुख हिरन हत्या मामले में बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को विशेष एनआईए अदालत से मिली जमानत पर फिलहाल रोक लगा दी है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने विशेष अदालत के जमानत आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने वाजे को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की है।


बुधवार को न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने NIA की अपील पर सुनवाई की और विशेष अदालत द्वारा दी गई जमानत पर अंतरिम रोक लगा दी। वाजे को फिलहाल जेल से रिहा नहीं किया गया है, क्योंकि जमानत की औपचारिकताएं पूरी होने से पहले ही हाईकोर्ट ने रोक लगा दी।


इससे पहले मामले की सुनवाई को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की दो पीठों के न्यायाधीशों ने खुद को अलग कर लिया था। मंगलवार को न्यायमूर्ति सारंग वी. कोतवाल और न्यायमूर्ति आर. आर. भोंसले की पीठ ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया था। बुधवार को न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति आशीष चव्हाण की पीठ ने भी सुनवाई से इनकार किया। इसके बाद मामला न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ के समक्ष पहुंचा।
NIA की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने विशेष अदालत के जमानत आदेश को चुनौती देते हुए दलील दी कि अदालत ने मामले की गंभीरता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धारा 43-D के तहत जमानत के प्रावधानों को उचित तरीके से नहीं देखा। NIA का कहना है कि मामले में वाजे की भूमिका कथित साजिश में केंद्रीय है और विशेष अदालत द्वारा जमानत दिया जाना तथ्यों और कानून दोनों के लिहाज से गलत था।
गौरतलब है कि 25 फरवरी 2021 को दक्षिण मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास विस्फोटक सामग्री से भरी एक एसयूवी बरामद हुई थी। वाहन में जिलेटिन की छड़ें और धमकी भरा पत्र मिला था। यह वाहन ठाणे के कारोबारी मनसुख हिरन का था। कुछ दिनों बाद 4 मार्च 2021 को हिरन का शव मिला था। NIA के अनुसार, इन दोनों घटनाओं के बीच आपसी संबंध था और वाजे इस कथित साजिश में शामिल थे।
मंगलवार को विशेष NIA अदालत ने वाजे को जमानत देते हुए कहा था कि अभियोजन के पास आरोप तय करने के लिए सामग्री हो सकती है, लेकिन इस स्तर पर जमानत से इनकार करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि जांच के दौरान अंबानी परिवार के किसी सदस्य का बयान दर्ज नहीं किया गया और कथित आतंक पैदा करने के आरोप के समर्थन में रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री नहीं है।
NIA ने इसी आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया है। अब 7 अक्टूबर को हाईकोर्ट में NIA की अपील पर आगे सुनवाई होगी, तब अदालत जमानत पर रोक और NIA की आपत्तियों पर आगे विचार करेगी।


