मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई की महापौर और भाजपा नगरसेवक रितू तावडे को 2016 के शिक्षक मारहाण मामले में सुनवाई के दौरान बार-बार गैरहाजिर रहना महंगा पड़ा है। मुंबई की सत्र अदालत ने बुधवार को उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट की अर्जी मंजूर करते हुए उन पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगली सुनवाई में भी गैरहाजिर रहने पर उनके खिलाफ वारंट जारी करने के साथ जमानत बंधपत्र रद्द किया जा सकता है।


यह मामला वर्ष 2016 में वाकोला के शास्त्री नगर स्थित महानगरपालिका की उर्दू माध्यम स्कूल में हुई कथित शिक्षक मारहाण से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, 29 जुलाई 2016 को शिक्षक के तबादले को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि रितू तावडे और अन्य लोगों ने स्कूल में पहुंचकर प्रबंधन के साथ विवाद किया और इस दौरान दो शिक्षकों के साथ कथित तौर पर मारपीट की। इस मामले में 11 अगस्त 2016 को एफआईआर दर्ज की गई थी।
मामले में पुलिस ने वर्ष 2017 में आरोपपत्र दाखिल किया था और 2019 में मामला सत्र न्यायालय को सौंपा गया। हालांकि, अब तक आरोप तय नहीं हो सके हैं। अदालत ने लगातार आरोपियों की गैरहाजिरी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की अनुपस्थिति से मुकदमे को लंबा खींचने की प्रवृत्ति दिखाई देती है।
बुधवार की सुनवाई में तावडे की ओर से अधिवक्ता दुर्गा राजपूत ने व्यक्तिगत उपस्थिति से स्थायी छूट की मांग की। उन्होंने दलील दी कि तावडे मुंबई की महापौर होने के कारण बीएमसी के विभिन्न कार्यक्रमों में व्यस्त रहती हैं। हालांकि, सरकारी पक्ष ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि मामला कई वर्षों से लंबित है और आरोपी जानबूझकर अदालत में उपस्थित नहीं हो रहे हैं।
अदालत ने तावडे और दो अन्य आरोपियों को इस सुनवाई के लिए व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट तो दी, लेकिन प्रत्येक पर 1,000 रुपये का खर्च लगाया। यह राशि एक सप्ताह के भीतर सरकारी खजाने में जमा करने का निर्देश दिया गया है। इससे पहले पिछली सुनवाई में भी तावडे पर गैरहाजिरी के लिए 300 रुपये का खर्च लगाया गया था।
अब मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को होगी, जब आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है। अदालत ने साफ किया है कि उस दिन तावडे को उपस्थित रहना होगा। यदि वह फिर गैरहाजिर रहती हैं, तो अदालत ने वारंट जारी करने और जमानत बंधपत्र रद्द करने की चेतावनी दी है।
मार्च 2026 में भी अदालत ने तावडे की दोषमुक्ति की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि रिकॉर्ड पर आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है और कथित पीड़ित शिक्षकों ने तावडे की पहचान हमलावर के रूप में की है। हालांकि, अदालत में दोष तय होना अभी बाकी है और मामले की सुनवाई जारी है।


