■ एनेस्थीसिया की ओवरडोज लेने की आशंका; पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर शुरू की जांच, रेजिडेंट डॉक्टरों के काम के दबाव और मानसिक स्वास्थ्य पर फिर उठे सवाल।
मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई के सायन स्थित बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के लोकमान्य तिलक म्युनिसिपल जनरल अस्पताल (एलटीएमजी) में एक युवा रेजिडेंट डॉक्टर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। कर्नाटक के रहने वाले प्रथम वर्ष के स्नातकोत्तर मेडिकल छात्र डॉ. शिवचरण आप्पा पाटील का शव शनिवार, 10 अक्टूबर की शाम अस्पताल के डॉक्टरों के हॉस्टल के बाथरूम में मिला। शुरुआती जांच में एनेस्थीसिया (बेहोशी की दवा) की अधिक मात्रा लेने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।


■ कई घंटों तक संपर्क नहीं होने पर हुआ खुलासा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, डॉ. पाटील शनिवार शाम काफी समय तक अपने सहकर्मियों के संपर्क में नहीं आए। उनके हॉस्टल के कमरे का दरवाजा लंबे समय तक बंद रहने और उनसे संपर्क नहीं हो पाने के बाद सहकर्मियों को चिंता हुई। इसके बाद उनकी तलाश की गई।शाम करीब 7:30 बजे उनके हॉस्टल के बाथरूम में उनका शव मिला। घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज की है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, ताकि मौत के वास्तविक कारण का पता लगाया जा सके। फिलहाल एनेस्थीसिया की ओवरडोज को मौत की संभावित वजह माना जा रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।


■ रेजिडेंट डॉक्टरों के काम के दबाव पर उठे सवाल
इस घटना के बाद महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (एमएआरडी) की बीएमसी इकाई ने शोक व्यक्त करते हुए रेजिडेंट डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियों को लेकर गंभीर चिंता जताई है।संगठन ने कहा कि लंबे समय तक ड्यूटी, काम का अत्यधिक बोझ और कर्मचारियों की कमी जैसी समस्याएं डॉक्टरों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। संगठन ने संबंधित अधिकारियों और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से डॉक्टरों के लिए काम के घंटे निर्धारित करने, पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति करने, अनिवार्य विश्राम सुनिश्चित करने तथा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
एमएआरडी ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की कार्यबल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि स्नातकोत्तर चिकित्सा छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। संगठन ने रेजिडेंट डॉक्टरों में नींद की कमी और लगातार लंबी ड्यूटी से उत्पन्न होने वाले मानसिक तनाव की समस्या भी उठाई।
■ पुलिस जांच जारी, मौत की वजह स्पष्ट होना बाकी
डॉ. पाटील की मौत ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले युवा डॉक्टरों की कार्य परिस्थितियों, मानसिक स्वास्थ्य और पर्याप्त आराम की उपलब्धता पर बहस छेड़ दी है।हालांकि, इस मामले में मौत का कारण और उससे जुड़ी परिस्थितियां अभी जांच के अधीन हैं। पुलिस की जांच तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


