मुंबई वार्ता संवाददाता

बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी के मामले में मुंबई पुलिस ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत कार्रवाई की है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मकोका की तीन धाराएं जोड़ी हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि वारदात के पीछे संगठित अपराध गिरोह का हाथ था और इसका मकसद रंगदारी वसूलना, गिरोह का दबदबा बढ़ाना और लोगों में डर पैदा करना हो सकता है।


■ 18 अक्टूबर को जुहू में हुई थी गोलीबारी
यह घटना 18 अक्टूबर 2026 की शाम मुंबई के जुहू इलाके में हुई थी। पुलिस के अनुसार, टाइगर श्रॉफ की कार पर मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने गोलीबारी की थी। अभिनेता इस हमले में बाल-बाल बच गए, जबकि उनके चालक और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए थे। हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हो गए थे।इस मामले में मुंबई पुलिस ने 19 अक्टूबर को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और शस्त्र अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद अपराध शाखा ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए हमले की साजिश, हथियारों की आपूर्ति और आरोपियों के कथित आपराधिक नेटवर्क की पड़ताल शुरू की।


■ मकोका की तीन धाराएं जोड़ी गईं
मुंबई पुलिस को 27 अक्टूबर 2026 को सक्षम प्राधिकारी से मकोका लगाने की अनुमति मिली। इसके बाद मामले में मकोका की धारा 3(1)(ii), धारा 3(2) और धारा 3(4) जोड़ी गईं। पुलिस के अनुसार, इन प्रावधानों के जरिए संगठित अपराध करने, उसमें सहायता देने और संगठित अपराध गिरोह की सदस्यता से जुड़े आरोपों पर कार्रवाई की जाएगी। मकोका लागू होने से आरोपियों के लिए जमानत हासिल करना अधिक कठिन हो सकता है। इस कानून के तहत जमानत के लिए कड़ी कानूनी शर्तें लागू होती हैं। साथ ही, जांच एजेंसी को आरोपपत्र दाखिल करने के लिए सामान्यतः निर्धारित 90 दिनों के बजाय 180 दिनों तक का समय मिल सकता है, हालांकि इसकी प्रक्रिया और अवधि मामले की कानूनी परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
■ लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से संबंध होने का संदेह
मुंबई अपराध शाखा की जांच में आरोपियों के कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े होने की बात सामने आई है। पुलिस इस आशंका की जांच कर रही है कि टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाने के पीछे रंगदारी वसूलने, गिरोह का प्रभाव बढ़ाने और आम लोगों में भय पैदा करने का मकसद था।जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि गोलीबारी की साजिश कैसे रची गई, हथियार कहां से लाए गए और आरोपियों के बीच संपर्क तथा पैसों के लेन-देन की क्या भूमिका थी। मामले में अनिल पंडित नामक व्यक्ति को भी वांछित आरोपी बताया गया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अदालत में होना बाकी है।
■ 10 या 11 आरोपी, सभी के खिलाफ कार्रवाई
इस मामले में शुरुआती रिपोर्टों में 10 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, 27 अक्टूबर की कुछ अन्य मीडिया रिपोर्टों में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 11 बताई गई है। पुलिस ने मकोका की धाराएं मामले के सभी आरोपियों के खिलाफ जोड़े जाने की जानकारी दी है। इसलिए आरोपियों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर दिखाई देता है।
मामले में चार आरोपियों को 27 अक्टूबर को मुंबई की एस्प्लेनेड अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने उन्हें 28 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में रखने का आदेश दिया। पुलिस को आरोपियों से आवाज के नमूने लेने सहित आगे की जांच करनी है।
फिलहाल मुंबई अपराध शाखा मामले की जांच कर रही है। पुलिस का मुख्य उद्देश्य कथित साजिश की पूरी कड़ी, हथियारों की आपूर्ति करने वालों और वारदात के पीछे सक्रिय नेटवर्क का पता लगाना है। मकोका लगाए जाने के बाद मामले की जांच अब संगठित अपराध के पहलू से भी आगे बढ़ेगी।


