लोकतंत्र की आत्मा को नष्ट करने वाले ज्ञानेश कुमार को जाना ही होगा, पहला नंबर ज्ञानेश कुमार का और उसके बाद रंगा-बिल्ला का: हर्षवर्धन सपकाल।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

चुनाव लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन चुनाव आयोग सत्ताधारी दल की कठपुतली बनकर घोटालों को अंजाम दे रहा है। चुनाव महज एक दिखावा बनकर रह गए हैं और सत्ताधारी दल को फायदा पहुँचाने के उद्देश्य से चुनाव आयोग का कामकाज चल रहा है। यह लोकतंत्र और संविधान के लिए बेहद घातक है। इसलिए लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन एकजुट हुआ है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जाना ही होगा। सबसे पहले ज्ञानेश कुमार का नंबर लगेगा और उसके बाद रंगा-बिल्ला का नंबर आएगा, इन तीखे शब्दों में महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने हमला बोला।

दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि संसद में जनता के सवाल उठाए जाते हैं और देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होती है, लेकिन संसद में विपक्ष को बोलने ही नहीं दिया जाता। यहां तक कि विपक्ष के नेता को भी अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जाता, यह पूरी दुनिया ने देखा है। सरकार की इस मनमानी का विपक्षी दलों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के निवास पर मॉक पार्लियामेंट का आयोजन किया गया। सरकार जिस तरह संसद के बाहर बुलडोजर चलाती है, उसी तरह सदन के भीतर भी विपक्ष की आवाज दबाने का काम कर रही है। संसद में केवल ‘नो-नो’ का माहौल बना हुआ है। राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार का मुद्दा बेहद गंभीरता से उठाया है। आज पूरी दुनिया में भारत की बदनामी हो रही है और इसके लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार जिम्मेदार हैं। इसलिए ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाया जाना चाहिए और उनके पीछे कौन है, यह भी देश के सामने आना चाहिए।

सपकाल ने आगे कहा कि 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली महारैली में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र से 5 हजार लोग दिल्ली आ रहे हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व पर सभी को दृढ़ विश्वास है। देश को इस कठिन परिस्थिति से केवल वही बाहर निकाल सकते हैं। कांग्रेस पार्टी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सभी जाति और धर्म के लोगों को एक झंडे के नीचे लाकर आजादी की बड़ी लड़ाई लड़ी थी। आज फिर वैसी ही परिस्थिति सामने है। देश की आजादी, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए यह संघर्ष बेहद महत्वपूर्ण है।

शिंदे गुट के विधायक संजय गायकवाड ने आत्महत्या करने वाले किसानों के बारे में जो बयान दिया है, वह बेहद आपत्तिजनक और निंदनीय है। संजय गायकवाड लगातार गैर-जिम्मेदाराना और विकृत बयान देते रहते हैं, लेकिन उनके खिलाफ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अथवा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कोई कार्रवाई नहीं करते। यह सत्ता का अहंकार है और जनता ही इस अहंकार को चकनाचूर करेगी, ऐसा भी हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।

सत्ता के लिए एकजुट है महायुतिभाजपा महायुति में बड़े पैमाने पर आंतरिक मतभेद हैं, लेकिन सभी दल केवल सत्ता के लालच में एकजुट हैं। महायुति में भाजपा की दबंगई चल रही है। हालांकि, सरकार में शामिल घटक दलों के बीच मतभेद कितने भी बढ़ जाएं, उनकी स्थिति ‘तेरा-मेरा बनता नहीं और तेरे बिना रहा भी नहीं जाता’ जैसी है। इस तंज के साथ सपकाल ने महायुति पर निशाना साधा।

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