मुंबई वार्ता संवाददाता

दीपावली के अवसर पर देशभर के प्रतिष्ठित आयुर्वेद विद्वानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार सुबह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से शिष्टाचार मुलाकात की। राष्ट्रीय आयुर्वेद विश्वविद्यालय के अध्यक्ष पद्मश्री एवं पद्मभूषण देवेंद्र त्रिगुणा के नेतृत्व में पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के साथ आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति, अनुसंधान और औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण एवं संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।


प्रतिनिधिमंडल में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य पद्मश्री राजेश कोटेचा, अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के अध्यक्ष वैद्य राकेश अमरनाथ शर्मा, महाराष्ट्र आयुर्वेद सम्मेलन की महासचिव एवं महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (एमयूएचएस) की विभिन्न समितियों की सदस्य तथा सर्जरी एलाइड बोर्ड की अध्यक्ष वैद्य ऋजुता ओमप्रकाश दुबे, आयुष मंत्रालय के पूर्व सलाहकार वैद्य मनोज नेसरी, श्री धूतपापेश्वर लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रंजीत आनंद पुराणिक और निखिल भारतीय आयुर्वेद विश्वविद्यालय के अध्यक्ष वैद्य ताराचंद शर्मा सहित कई प्रतिष्ठित विद्वान शामिल थे।बैठक के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में उपयोग होने वाली औषधीय वनस्पतियों की उपलब्धता और उनके व्यापक उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।


उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में इस्तेमाल होने वाली अनेक आवश्यक औषधीय जड़ी-बूटियां जंगलों में पाई जाती हैं। ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सकों को जंगलों में जाकर आदिवासी समुदायों और वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से संवाद करना चाहिए। उनसे औषधीय वनस्पतियों के बारे में प्रामाणिक जानकारी जुटाकर उनके संरक्षण, व्यवस्थित खेती और उत्पादन को बढ़ावा देना चाहिए।
राष्ट्रपति ने यह भी सुझाव दिया कि इन औषधीय वनस्पतियों के चिकित्सकीय उपयोग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि पूरी दुनिया आयुर्वेद के लाभों से परिचित हो सके। इससे आदिवासी और वनवासी समुदायों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे तथा उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूती मिल सकेगी।प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने राष्ट्रपति के सुझावों को गंभीरता से सुना और इस दिशा में तत्काल कदम उठाने पर सहमति जताई। देश की मुख्यधारा में आयुर्वेद को मिल रहे बढ़ते समर्थन से प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने प्रसन्नता व्यक्त की।
उल्लेखनीय है कि इस प्रतिनिधिमंडल के दो सदस्य वैद्य राकेश शर्मा और वैद्य ऋजुता दुबे मुंबई के चरनी रोड स्थित मित्तल आयुर्वेद कॉलेज के पूर्व विद्यार्थी रहे हैं। इस मुलाकात को आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के विकास, अनुसंधान और वैश्विक पहचान को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


