महाराष्ट्र के सभी सफाई कर्मचारियों को मालिकाना हक के साथ मिलेंगे घर, मुख्यमंत्री फडणवीस ने की घोषणा।

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■ मुंबई में 140 आवासों का उद्घाटनपंचशील नगर में प्री-फैब्रिकेटेड तकनीक से बनी बीएमसी की पहली इमारत का लोकार्पण, 29 हजार सफाई कर्मचारियों को आवास उपलब्ध कराने की योजना पर काम शुरू।

मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी सफाई कर्मचारियों को सेवा आवास के साथ-साथ मालिकाना हक वाले घर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इस योजना की शुरुआत भी हो चुकी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विश्वास जताया कि इस निर्णय से भविष्य में सफाई कर्मचारियों को अपने घर की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी खुद अपने स्वास्थ्य की परवाह किए बिना नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं। इसलिए उन्हें सम्मानजनक और सुविधायुक्त आवास उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस शुक्रवार को दक्षिण मुंबई के कोलाबा स्थित पंचशील नगर में आश्रय योजना कक्ष, चरण-2 के तहत नवनिर्मित कर्मचारी आवासों के उद्घाटन और चाबी वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर 140 आवासों वाली परियोजना का उद्घाटन किया गया। खास बात यह है कि इन इमारतों का निर्माण प्री-फैब्रिकेटेड तकनीक से किया गया है। यह मुंबई महानगरपालिका की इस तकनीक से निर्मित पहली इमारत है।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं मुंबई शहर के पालकमंत्री एकनाथ शिंदे, महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक राहुल नार्वेकर, मुंबई की महापौर रितु तावड़े, उपमहापौर संजय घाड़ी, सदन के नेता गणेश खणकर, शिवसेना गुटनेता अमेय घोले, नगरसेवक मकरंद नार्वेकर, नगरसेविका हर्षिता नार्वेकर, गौरवी शिवलकर-नार्वेकर, नामनिर्देशित नगरसेवक कमलाकर दलवी, बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े, अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त डॉ. विपिन शर्मा, उपायुक्त किरण दिघावकर और शाइना एन.सी. सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सफाई कर्मचारियों के लिए डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर श्रमसाफल्य योजना और वाल्मीकि आवास योजना शुरू की गई हैं। सफाई कर्मचारियों को दिए जाने वाले सेवा आवास का लाभ उनके स्थान पर नौकरी पाने वाले बेटे को भी हस्तांतरित किया जाता है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2028 तक सफाई कर्मचारियों को सेवा आवास उपलब्ध कराना है।

उन्होंने बताया कि अब तक प्री-फैब्रिकेटेड तकनीक का इस्तेमाल मुख्य रूप से बड़ी निजी इमारतों के निर्माण में किया जाता था। पहली बार मुंबई महानगरपालिका ने इस तकनीक का उपयोग कर अपनी इमारत का निर्माण किया है। इस परिसर में सामूहिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने कहा कि मुंबईकरों के स्वास्थ्य की रक्षा करने वाले सफाई कर्मचारियों को अच्छे और बड़े घर मिलना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका एशिया की अपेक्षाकृत संपन्न महानगरपालिकाओं में शामिल है। इसलिए उसके सफाई कर्मचारियों को बेहतर आवास मिलना चाहिए। उन्होंने लाड-पागे समिति का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1973 में इस समिति का गठन किया गया था, लेकिन कुछ कठिनाइयों के कारण उसका कामकाज बंद हो गया था। वर्ष 2015 में सरकार ने नए निर्णय के माध्यम से समिति को फिर से शुरू किया और उत्तराधिकार के आधार पर नियुक्ति की व्यवस्था लागू की।

उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों के ऐसे बच्चों को, जो निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी करते हैं, वर्ग-तीन में नौकरी देने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने न्यायालयीन लड़ाई जीतकर लाड-पागे समिति की सिफारिशों को लागू किया है। इसके अलावा ठेका, दैनिक वेतन और एवजदार पद्धति से काम करने वाले सफाई कर्मचारियों को भी न्यूनतम वेतन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।

■ सफाई कर्मचारी ही मुंबई के असली हीरो :

एकनाथ शिंदेउपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सफाई कर्मचारियों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि जब मुंबई गहरी नींद में होती है, तब सफाई कर्मचारी सड़कों की सफाई कर शहरवासियों के स्वास्थ्य की रक्षा कर रहे होते हैं। कोरोना महामारी के दौरान भी उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना सेवाएं दीं। गहन सफाई अभियान हो या बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति, ये कर्मचारी हमेशा सड़कों पर उतरकर काम करते हैं। इसलिए मुंबई के असली हीरो सफाई कर्मचारी ही हैं।

शिंदे ने बताया कि बीएमसी के 29 हजार सफाई कर्मचारियों को सेवा आवास उपलब्ध कराने की योजना का पहला चरण शुरू हो गया है। मुंबई की 146 कर्मचारी बस्तियों का चरणबद्ध तरीके से पुनर्विकास कर सभी कर्मचारियों को बेहतर आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। इस परियोजना में पहले 150 वर्ग फुट के घरों के स्थान पर अब 300 वर्ग फुट के घर दिए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि कई सफाई कर्मचारी मुंबई के बाहर रहते हैं और उन्हें प्रतिदिन रेलगाड़ी से लंबी यात्रा करनी पड़ती है। इससे उनके स्वास्थ्य और कामकाज पर असर पड़ता है। यदि उन्हें मुंबई में ही सेवा आवास मिलते हैं तो उनके स्वास्थ्य और कार्यक्षमता में सुधार होगा तथा शहर को स्वच्छ और स्वस्थ रखने में मदद मिलेगी।

उपमुख्यमंत्री ने बीएमसी को निर्देश दिया कि सफाई कर्मचारियों के बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए अलग योजना तैयार की जाए, ताकि वे डॉक्टर, इंजीनियर, वकील और वास्तुकार बनकर समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ सकें।

■ 29 हजार सफाई कर्मचारियों के आवास का सपना साकार करने की शुरुआत :

राहुल नार्वेकरविधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा कि मुंबई के 29 हजार सफाई कर्मचारियों को घर उपलब्ध कराने के सपने को साकार करने की दिशा में पंचशील नगर के 140 आवासों का चाबी वितरण एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। मुंबई को स्वच्छ और स्वस्थ रखने वाले सफाई कर्मचारियों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में यह अहम कदम है।उन्होंने बताया कि पंचशील नगर में दो इमारतों में कुल 140 आवास बनाए गए हैं। इनमें 10 लिफ्ट के साथ अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। स्वच्छ परिसर, बच्चों के अध्ययन की सुविधाएं और विभिन्न गतिविधियों के अनुकूल वातावरण इन इमारतों की विशेषताएं हैं। इससे सफाई कर्मचारियों के परिवारों के बेहतर भविष्य का रास्ता तैयार होगा।

■ आश्रय योजना के तहत 12,144 घरों का निर्माण

बीएमसी की आश्रय योजना के तहत 30 कर्मचारी बस्तियों की 35 परियोजनाओं का तीन चरणों में पुनर्विकास किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत 300 वर्ग फुट क्षेत्रफल वाले 11,371 और 600 वर्ग फुट क्षेत्रफल वाले 773 आवास बनाए जाएंगे। इस प्रकार कुल 12,144 घर उपलब्ध कराने की योजना है।इसके अलावा बीएमसी के सभी 29 हजार सफाई कर्मचारियों को सेवा आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।पांच सफाई कर्मचारियों को प्रतिनिधिक तौर पर सौंपी गई चाबियांपंचशील नगर में आयोजित समारोह के दौरान 140 आवासों की चाबियां वितरित की गईं।

प्रतिनिधिक स्वरूप में सफाई कर्मचारी भारती धोत्रे, सचिन सोलंकी, वंदना गोरेगांवकर, श्यामसिंह वाल्मीकि, प्रशांत सावंत और सतीश मार्चंडे को चाबियां सौंपी गईं। इसके बाद मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने नवनिर्मित इमारतों तथा आवासों का निरीक्षण भी किया।

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