मास्टर स्ट्रोक

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर क्या अपने सियासी करियर का सबसे बड़ा मास्टर स्ट्रोक चल दिया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल का यह फैसला 2025 में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले आया है। केजरीवाल के इस्तीफे के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। दिल्ली में 10 साल से आप की सरकार है और माना जा रहा है कि इस बार पार्टी को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, दिल्ली नगर निगम भी आप के पास है, जिससे जनता की उम्मीदें बढ़ गई हैं। पिछले एक साल से दिल्ली में बाढ़, डेंगू जैसी बीमारियों का प्रकोप, प्रदूषण और इंफ्रास्ट्रक्चर की हालत जैसी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। इन मुद्दों के कारण आप का शिक्षा और स्वास्थ्य मॉडल भी फीका पड़ रहा है। दिल्ली के कई इलाकों में जल संकट भी बड़ा मुद्दा है।  केजरीवाल का यह फैसला प्रशासनिक या पूरी तरह से राजनीतिक यह तो समय ही बताएगा। लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस भी इस बार मजबूती के साथ दिल्ली चुनाव के मैदान में जाएगी। वहीं बीजेपी दिल्ली की सभी लोकसभा सीटें जीतकर वापसी की आस लगाए हुए है। केजरीवाल ने इस्तीफे के बाद जनता से सीधे संवाद करते हुए कहा कि यदि आपको लगता है कि मैं निर्दोष हूं, तो मुझे वोट दें। आप ने इस फैसले को पारदर्शिता का कदम बताया है। मंत्री आतिशी और सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इससे साबित होता है कि केजरीवाल कितने ईमानदार हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा केजरीवाल पर लगाई गई जमानत शर्तें भी उनके लिए सरकार चलाना मुश्किल बना रही थीं। हालांकि, कानूनी सलाह से वह इन कठिनाइयों से निपट सकते थे। इससे साफ है कि यह फैसला प्रशासनिक नहीं, बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक है। पहले हरियाणा और खासकर दिल्ली का चुनाव पार्टी के लिए काफी महतवपूर्ण है। अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे की घोषणा ने बीजेपी को भी अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। अभी तक बीजेपी लगातार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल को घेरकर उनके इस्तीफे की मांग करती आ रही थी। हाल ही में बीजेपी विधायकों ने राष्ट्रपति से मिलकर दिल्ली विधानसभा को भंग करने की मांग भी की थी। अब जिस तरह इस्तीफा देकर केजरीवाल ने सरकार के बाहर रहने और विधानसभा भंग करने के बजाय नया सीएम बनाने का फैसला किया है, उसके बाद से बीजेपी भी केजरीवाल के इस नए दांव की इसकी काट ढूंढने में लगी है। दिल्ली की सियासत में सबसे ज्यादा गर्म मुद्दा एलजी और अफसरों के साथ आम आदमी पार्टी सरकार की खींचतान का रहा है। नया सीएम बनने के बाद वर्चस्व की इस लड़ाई के दांव-पेच भी बदल सकते हैं। चूंकि अब बीजेपी के लिए सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल को घेरना आसान नहीं होगा, ऐसे में बीजेपी अब भावी सीएम को लेकर आम आदमी पार्टी को घेरने की कोशिश करेगी। बीजेपी सूत्रों का कहना है कि अगर सुनीता केजरीवाल को सीएम बनाया जाता है तो बीजेपी परिवारवाद का मुद्दा भी उठा सकती है। आतिशी को सीएम बनाए जाने पर एलजी और अफसरों के साथ विवाद की स्थिति कायम रह सकती है, जिसे बीजेपी अपने पक्ष में भुनाना चाहेगी। बीजेपी का पूरा अमला अभी भी केजरीवाल की नई सियासी चाल की काट ढूंढने में लगा हुआ है। आप विधायक दल की बैठक में क्या फैसला लिया जाता है, फिलहाल बीजेपी की नजर उसी पर है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा केजरीवाल पर लगाई गई जमानत शर्तें भी उनके लिए सरकार चलाना मुश्किल बना रही थीं। हालांकि, कानूनी सलाह से वह इन कठिनाइयों से निपट सकते थे। इससे साफ है कि यह फैसला प्रशासनिक नहीं, बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक है। पहले हरियाणा और खासकर दिल्ली का चुनाव पार्टी के लिए काफी महतवपूर्ण है। केजरीवाल ने 2013 में भ्रष्टाचार विरोधी मुद्दे पर चुनाव लड़ा था, और अब वे एक बार फिर उसी मुद्दे पर जनता के बीच जाना चाहते हैं। उन्होंने अपने इस्तीफे के जरिए लोगों को 2013 की याद दिला दी है। आप को उम्मीद है कि इससे जनता का ध्यान मौजूदा समस्याओं से हट जाएगा। देखना होगा कि केजरीवाल की यह रणनीति 2025 के चुनाव में कितनी कारगर साबित होती है। क्या दिल्ली की जनता एक बार फिर आप को मौका देगी? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। इसके साथ ही अब यह भी सवाल है कि दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। मुख्यमंत्री जो भी बनेगा उसके लिए भी दिल्ली में बचे हुए समय के लिए चुनौती कम नहीं होगी।

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