क्षमा का भाव जितना बढ़ेगा, उतनी ही अच्छाई का विकास होगा : दीदी कृष्णाजी ।

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■ दादा जेपी वासवानी की 107वीं जयंती विश्वभर में ‘विश्व क्षमा दिवस’ के रुप में श्रद्धा व समर्पण के साथ मनाई गई।

मुंबई वार्ता/संजय जोशी

विश्व विख्यात श्रद्धेय संत पूज्य दादा जेपी. वासवानीजी की 107वीं जयंती सम्पूर्ण विश्व में ‘विश्व क्षमा दिवस’ के रुप में अपार श्रद्धा, प्रेम एवं समर्पण भाव से तथा इस वर्ष के विषय ‘जाने देने की शक्ति’ के साथ मनाई गई। वैश्विक स्तर पर पूज्य दादा वासवानीजी क्षमा की परिवर्तनकारी एवं चमत्कारी शक्ति के सशक्त प्रवक्ता थे।

वे सदैव कहा करते थे कि क्षमा आत्मिक शांति व गहन उपचार की कुँजी है। इसी भावभूमि पर, दादा की जयंती प्रतिवर्ष ‘विश्व क्षमा दिवस’ के रुप में मनाई जाती है। इसी दौरान दिवस विशेष पर दोपहर में ‘मोमेंट ऑफ़ काल्म’ के अंतर्गत दो मिनट का मौन रखा जाता है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति क्षमा करता है, क्षमा माँगता है और प्रेम तथा शांति की ऊर्जा का प्रसार करता है।

इस दौरान क्षमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, पूज्य दीदीकृष्णाजी ने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि क्षमा का भाव जितना बढ़ेगा, उतनी ही अच्छाई का विकास होगा। उल्लेखनीय है कि इस वैश्विक अभियान में लायंस क्लब, मास्टरकार्ड, वीवर्क जैसी प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट संस्थाओं ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। परमार्थ निकेतन, ब्रह्माकुमारीज, एवं श्रीमद राजचन्द्र मिशन जैसी आध्यात्मिक संस्थाओं ने भी मोमेंट ऑफ काल्म का पालन कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

मिशन के जन संपर्क अधिकारी नरेश सिंघानी ने बताया कि सिंगापुर, बार्सिलोना, लॉस एंजेलेस, हांगकांग सहित अनेक साधु वासवानी केंद्रों ने भी श्रद्धा, भक्ति और संकल्प भाव से इस दिवस को मनाया। घर, कार्यालय, मंदिर, विद्यालय, हर स्थान पर लोगों ने अपने भीतर की रंजिशों को छोड़ने, पुराने मनमुटावों को समाप्त करने और अंतर्मन की गाँठों को सुलझाने का संकल्प लिया।

उन्होंने बताया कि पुणे स्थित मिशन के ग्लोबल मुख्यालय में तीन दिवसीय श्रद्धांजलि कार्यक्रम सम्पन्न हुआ, जिसमें सत्संग, भजन, कीर्तन और पूज्य दादा वासवानीजी के प्रेरणास्पद प्रवचनों का सजीव प्रसारण हुआ। पूज्य दीदी कृष्णाकुमारीजी ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में यह भी कहा, कमज़ोरियों को छुपाने से कुछ नहीं होता। आत्मस्वीकृति ही सच्चे उत्थान की राह है।

उन्होंने सभी को आह्वान किया कि वे गुरुचरणों में आत्मस्वीकृति करें, क्षमा माँगें और आशीर्वाद प्राप्त करें। मिशन और उससे सम्बद्ध संस्थानों में इस अवसर पर सेवा कार्य भी बड़े पैमाने पर संपन्न हुए।

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