बीएमसी ने कफ परेड का ‘CPRA ग्रीन्स गार्डन’ अपने कब्जे में लिया, एसोसिएशन ने हाईकोर्ट जाने की दी चेतावनी।

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मुंबई वार्ता संवाददाता


दक्षिण मुंबई के कफ परेड स्थित ‘CPRA ग्रीन्स गार्डन’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने गुरुवार को इस हरित क्षेत्र का नियंत्रण कफ परेड रेजिडेंट्स एसोसिएशन (CPRA) से वापस ले लिया। यह कदम कथित दुरुपयोग और आम जनता की पहुंच पर प्रतिबंध से जुड़ी लगातार मिल रही शिकायतों के बाद उठाया गया।


कैप्टन प्रकाश पेंथे मार्ग पर पाम स्प्रिंग्स इमारत के पास स्थित इस गार्डन को वर्ष 1987 में रखरखाव के लिए नागरिक संस्था को सौंपा गया था। हालांकि, गुरुवार को बीएमसी द्वारा लगाए गए बोर्ड के साथ ही एसोसिएशन का नियंत्रण समाप्त कर दिया गया।


■ शिकायतों के बाद कार्रवाई


सूत्रों के मुताबिक, बीएमसी को इस गार्डन में बिना अनुमति शादियों और निजी कार्यक्रमों के आयोजन की शिकायतें मिली थीं। इसके अलावा आम लोगों की एंट्री सीमित करने के आरोप भी लगे। इन शिकायतों के आधार पर बीएमसी ने 2019, 2021 और 2025 में कई बार कारण बताओ नोटिस जारी किए, लेकिन एसोसिएशन के जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए।
अधिकारियों ने बताया कि एसोसिएशन और बीएमसी के बीच रखरखाव का समझौता 13 साल पहले ही समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद स्थिति स्पष्ट न होने पर आखिरकार बीएमसी ने गार्डन का नियंत्रण अपने हाथ में लेने का निर्णय लिया। अब इसका रखरखाव बीएमसी का गार्डन विभाग करेगा।

■ एसोसिएशन का पलटवार


CPRA की अध्यक्ष लॉरा डी’सूजा ने बीएमसी के फैसले का विरोध करते हुए स्थानीय पार्षद मकरंद नार्वेकर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कोविड काल में गार्डन के एक हिस्से को घेरकर वहां पानी पंप रूम बनाया गया और उसे पास की झुग्गी को सौंप दिया गया।


उन्होंने आरोप लगाया कि जब एसोसिएशन ने इसका विरोध किया तो उनके सदस्यों पर हमला किया गया। साथ ही, गार्डन में शोरगुल वाले शादी समारोह आयोजित किए गए, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
डी’सूजा ने बताया कि एसोसिएशन ने नगर आयुक्त अश्विनी भिडे और सहायक आयुक्त जयदीप मोरे को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने इसे “नगर अधिकारियों और स्थानीय पार्षद द्वारा लंबे समय से संभाले जा रहे सार्वजनिक गार्डन पर अवैध कब्जे की कोशिश” बताया है।

एसोसिएशन का दावा है कि वह 1987 से इस गार्डन का रखरखाव कर रहा है और हर महीने करीब 1 लाख रुपये खर्च कर स्टाफ, सुरक्षा और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराता रहा है। साथ ही, अतिक्रमण रोकते हुए गार्डन को आम जनता के लिए खुला रखा गया।

स्थानीय पार्षद मकरंद नार्वेकर ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अगर गार्डन में कोई गलत गतिविधि हो रही थी तो उसे रोकना एसोसिएशन की जिम्मेदारी थी। उन्होंने कहा, “यह सार्वजनिक गार्डन है, निजी संपत्ति नहीं। अगर एसोसिएशन इसे संभाल नहीं पा रही है तो इसे बीएमसी को सौंप देना ही उचित है।”


CPRA ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वह इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करेगी।

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