बी. के. बिड़ला महाविद्यालय में छह दिवसीय हिंदी नवलेखक शिविर संपन्न, 9 राज्यों के 70 रचनाकारों ने लिया हिस्सा।

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विपिन शुक्ल/मुंबई वार्ता

कल्याण स्थित बी. के. बिड़ला महाविद्यालय और केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित छह दिवसीय हिंदीतर भाषी हिंदी नवलेखक शिविर का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम में महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के डीन प्रो. अवधेश शुक्ल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

प्रो. शुक्ल ने मध्यकालीन कवियों की रचना प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए नवलेखकों को उस कालखंड के साहित्य से स्वस्थ और सशक्त लेखन के लिए प्रेरणा लेने की सलाह दी। विशेष अतिथि के रूप में मुंबई विश्वविद्यालय के डीएलएलएलई निदेशक डॉ. बलिराम गायकवाड़ ने लेखन के नए आयामों से युवाओं को परिचित कराया और देश को जोड़ने वाले ऐसे राष्ट्रीय आयोजनों के लिए महाविद्यालय प्रबंधन की सराहना की।

महाविद्यालय के शिक्षा निदेशक डॉ. नरेश चन्द्र ने साहित्य को समाज का मार्गदर्शक बताते हुए साहित्यकारों को सजग और जिम्मेदार लेखन करने का संदेश दिया। प्राचार्य डॉ. अविनाश पाटील ने केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महाविद्यालय की प्रबंधन समिति ऐसे महत्वपूर्ण आयोजनों में सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहती है।

निदेशालय के सहायक निदेशक शरत्नेश कुमार मिश्र ने विभाग की गतिविधियों की जानकारी देते हुए नवलेखकों को पहले अच्छा पाठक बनने की सीख दी।‘समीचीन’ के संपादक डॉ. सतीश पाण्डेय ने कथेतर गद्य विधाओं की रचना प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा की, जबकि दिल्ली विश्वविद्यालय से पधारे प्रो. राजेंद्र गौतम ने कविता कला के मर्म को सरल शब्दों में समझाया।

शिविर के समन्वयक प्रो. श्यामसुंदर पाण्डेय ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।सप्ताह भर चले इस शिविर में असम, पोंडीचेरी, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, अरुणाचल प्रदेश और महाराष्ट्र सहित नौ राज्यों के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए 70 नवलेखकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को डॉ. दामोदर खडसे, डॉ. मधु कांकरिया, डॉ. हूबनाथ पाण्डेय, डॉ. सत्यदेव त्रिपाठी, डॉ. नेहा कल्याणी, डॉ. सचिन गपाट और वरिष्ठ पत्रकार नवीन पाण्डेय सहित कई विद्वानों ने साहित्य सृजन के विविध आयामों और साहित्यकारों के दायित्वों से परिचित कराया।

यह आयोजन उप प्राचार्य डॉ. हरीश दुबे, डॉ. महादेव यादव, डॉ. बालकवि सुरंजे, डॉ. प्रतिभा गाढे, डॉ. सीताराम म्हस्के, प्रा. विशाखा, प्रा. तन्मयी तथा हिंदी विभाग के विद्यार्थियों की अथक मेहनत से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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