मुंबई वार्ता संवाददाता

मनुवादी व्यवस्था ने जिस तरह समाज के कई वर्गों पर नियंत्रण रखा था, उसी तरह पानी पर भी नियंत्रण रखकर समाज के एक वर्ग को उससे वंचित रखा गया था। महामानव डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने 20 मार्च 1927 को महाड़ के चवदार तालाब पर सत्याग्रह कर एक ऐतिहासिक क्रांति की थी। इस क्रांति ने जातिवादी, छुआछूत की व्यवस्था को समाप्त कर समानता, बंधुता और सामाजिक न्याय का संदेश दिया। महाड़ के चवदार तालाब का पानी ‘समता का अमृत’ है, और इस पानी को लेकर गांव-गांव के तालाब, नदियों और बांधों में डालकर समानता का संदेश दूर-दूर तक पहुंचाएं, ऐसा आह्वान महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने किया।


महाड़ में ‘चवदार तालाब सत्याग्रह समता शताब्दी वर्ष’ समारोह का शुभारंभ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, महात्मा गांधी के प्रपौत्र एवं वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता तुषार गांधी, उल्का महाजन, गांधीवादी नेता जयंत दिवाण, कांग्रेस के एस.सी. विभाग के प्रदेशाध्यक्ष सिद्धार्थ हत्तिअंबिरे, रायगढ़ जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र घरत, प्रदेश कांग्रेस के महासचिव शाह आलम शेख, एड. श्रद्धा ठाकुर, अमर खानापुरे, फिशरमैन कांग्रेस के मार्तंड नाखवा, प्रवक्ता हनुमंत पवार, प्रदेश सचिव श्रुति म्हात्रे, पनवेल युवक कांग्रेस अध्यक्ष हेमराज म्हात्रे सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी उपस्थित थे।


कार्यक्रम के बाद हर्षवर्धन सपकाल सहित कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सभास्थल से चवदार तालाब तक पदयात्रा कर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की और तालाब का पानी कलश में भरकर पदाधिकारियों को दिया। यह पानी राज्य के सभी जिलों में ले जाकर गांव-गांव के जलस्रोतों में डाला जाएगा।


इस अवसर पर हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि इंसान को इंसान की तरह व्यवहार करना सिखाने के लिए महाड़ का यह सत्याग्रह किया गया था। इस आंदोलन के दौरान डॉ. आंबेडकर को कई कठिनाइयों और विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। नासिक के कालाराम मंदिर प्रवेश आंदोलन के समय भी उन्हें इसी तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। महाड़ की इस क्रांति में छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा फुले और महात्मा गांधी के विचारों की प्रेरणा थी। डॉ. आंबेडकर के इस सत्याग्रह के बाद मनुवादी शक्तियों ने चवदार तालाब का शुद्धिकरण किया था। आज भी उसी विचारधारा का सामना समाज को करना पड़ रहा है, जो बहुजन समाज को विभिन्न संसाधनों से वंचित रखने का काम कर रही है, ऐसा उन्होंने कहा।
तुषार गांधी ने कहा कि चवदार तालाब की क्रांति लोकतंत्र और संविधान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है। यह एक अहिंसक आंदोलन था, जिसने समानता और स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया। डॉ. आंबेडकर ने महाड़ में पानी के अधिकार के लिए सत्याग्रह किया और तीन वर्ष बाद महात्मा गांधी ने नमक के लिए सत्याग्रह किया—इन दोनों घटनाओं का गहरा संबंध है। आज भी समाज में पूर्ण समानता नहीं है। केवल कार्यक्रम आयोजित करने से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि गांव-गांव में समानता का संदेश पहुंचाना होगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार इस दिशा में काम नहीं कर रही है और महाड़ की इस ऐतिहासिक घटना को भी आर.एस.एस. के नजरिए से प्रस्तुत करने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि समाज में विभाजन पैदा करने वाली विचारधारा को समाप्त करें।उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं से बनता है। कांग्रेस का कार्यकर्ता समाजसेवक और सत्याग्रही होता है, लेकिन आज इन गुणों में कमी आई है। अन्य दलों के कार्यकर्ता आदेश पर काम करते हैं, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ता आदर्शों पर काम करता है।
उल्का महाजन ने कहा कि 20 मार्च 1927 के सत्याग्रह से एक दिन पहले 19 मार्च को महाड़ के गाड़ी तळ पर एक महत्वपूर्ण सम्मेलन हुआ था, जिसमें सभी जातियों के लोगों ने भाग लिया था। लेकिन आज यह कार्यक्रम केवल एक वर्ग तक सीमित हो गया है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। रायगढ़ जिला दो महान व्यक्तित्वों—छत्रपति शिवाजी महाराज और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर—की भूमि है। ‘शिवराय से भीमराय’ अभियान के माध्यम से हम पिछले 9 वर्षों से समाज में एकता का संदेश दे रहे हैं। यह संघर्ष सभी जातियों और धर्मों को मिलकर लड़ना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. आंबेडकर और शिवाजी महाराज किसी एक जाति के नहीं, बल्कि पूरे समाज के हैं। उन्हें जातीय सीमाओं में बांधने की साजिश को विफल करना होगा।कार्यक्रम का प्रारंभिक भाषण एस.सी. विभाग के प्रदेशाध्यक्ष सिद्धार्थ हत्तिअंबिरे ने दिया। उन्होंने जानकारी दी कि ‘चवदार तालाब सत्याग्रह समता शताब्दी वर्ष’ पूरे राज्य में मनाया जाएगा और शताब्दी वर्ष पर इसे भव्य स्तर पर आयोजित किया जाएगा।


