मुंबई वार्ता संवाददाता

Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) ने शहर में अपना वार्षिक ट्री मेंटेनेंस अभियान शुरू कर दिया है। इस अभियान के तहत मुंबई में कुल 46,336 पेड़ों की छंटाई (प्रूनिंग) की जाएगी, जिसे मई के अंत तक या अधिकतम 7 जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।


बीएमसी के गार्डन विभाग द्वारा किए गए प्रारंभिक सर्वे के आधार पर पेड़ों का चयन किया गया, जिसे बाद में ठेकेदारों ने सत्यापित किया। इस प्रक्रिया में 325 पेड़ों को मृत या खतरनाक पाया गया, जिन्हें सार्वजनिक सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए हटाने की सिफारिश की गई है।
अब तक बीएमसी 12,561 पेड़ों की छंटाई कर चुकी है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 27% है। इसके अलावा 279 खतरनाक या सूखे पेड़ों को हटाया जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार, पेड़ों की छंटाई का उद्देश्य उनकी शाखाओं का भार कम करना, संतुलन बनाए रखना और स्वस्थ विकास सुनिश्चित करना है।
बीएमसी मुख्य रूप से सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर स्थित पेड़ों की छंटाई करती है, जबकि निजी और अन्य सरकारी जमीनों पर किए जा रहे कार्यों की निगरानी भी करती है, ताकि पूरे शहर में पेड़ देखभाल की प्रक्रिया एक समान बनी रहे।
हालांकि, इस अभियान के समय को लेकर स्थानीय निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। वडाला के निवासी निमिष माल्डे ने गर्मियों में छंटाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस मौसम में पेड़ों की छाया सबसे ज्यादा जरूरी होती है और यह काम मानसून के बाद किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई बार बिना अनुमति पत्र और बिना अधिकारियों की मौजूदगी में काम किया जाता है।
वहीं बीएमसी अधिकारियों ने इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि गर्मियों में छंटाई करना वैज्ञानिक रूप से सही है। उनके अनुसार, मानसून में पेड़ों में फंगल इंफेक्शन का खतरा अधिक रहता है, जिससे कटाई के बाद पेड़ों को नुकसान हो सकता है, जबकि गर्मियों में छंटाई से पेड़ों की रिकवरी बेहतर होती है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि बीएमसी कर्मचारियों को आर्बोरिस्ट (पेड़ विशेषज्ञ) से प्रशिक्षण दिया जाता है और ठेकेदारों की टीम में हॉर्टिकल्चरिस्ट या बायोलॉजिस्ट को शामिल करना अनिवार्य होता है।
फिलहाल, बीएमसी का यह अभियान शहर में पेड़ों की सुरक्षा और संतुलित विकास के उद्देश्य से जारी है, लेकिन इसके समय और प्रक्रिया को लेकर बहस भी तेज हो गई है।


