दीदी कृष्णाकुमारीजी ने गुरु की महानता पर प्रकाश डाला.
मुंबई वार्ता/संजय जोशी

साधु वासवानी मिशन, पुणे में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व गुरुवार को आध्यात्मिकता और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देश-विदेश से सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित हुए। यह दिन महान गुरुजनों पूज्यनीय साधु वासवानी और दादा जेपी. वासवानीजी को समर्पित था, जिन्हें लाखों लोग अपने आत्मिक पथदर्शक मानते हैं। मिशन के अंतरराष्ट्रीय केंद्रों पर भी इस दिन विशेष सत्संग और सेवा गतिविधियाँ आयोजित की गई।


सुबह 6 बजे सैकड़ों श्रद्धालु गुरुजनों की पवित्र समाधियों पर जलाभिषेक और प्रतिमाओं का शुद्धिकरण करने हेतु एकत्र हुए। इसके बाद 108 कुंडीय हवन का आयोजन हुआ, जिसमें 108 गायत्री मंत्रों का उच्चारण किया गया। इसमें चार वर्ष के छोटे बच्चों ने भी भाग लिया। इसके बाद आयोजित सत्संग में भजन, कीर्तन और दीदी कृष्णाकुमारीजी का संदेश प्रस्तुत किया गया।
उन्होंने गुरु की शाश्वत उपस्थिति और उसकी रक्षणशक्ति की बात कही। उन्होंने कहा कि गुरु सदैव हमारे साथ होते हैं, लेकिन शिष्य को पूर्ण विश्वास और समर्पण के साथ आत्मिक पथ पर चलना चाहिए। दोपहर एक बजे सभी श्रद्धालुओं को गुरु लंगर भोजन प्रसाद परोसा गया। सांयकालीन सत्संग में भी भजन, कीर्तन और साधु वासवानी व दादा वासवानी के संदेशों की रिकॉर्डिंग प्रस्तुत की गई। गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में मिशन ने अनेक सेवा कार्य भी किए।
अस्पतालों में फलों का वितरण किया गया, ज़रूरतमंद परिवारों को राशन किट प्रदान की गईं, और पुणे की चार नगरपालिका शालाओं के आठ सौ से अधिक बच्चों को स्टेशनरी किट, मोज़े व रुमाल आदि वितरित किए गए।


