मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्याध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने अयोध्या राम मंदिर में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “अगर मंदिर में भ्रष्टाचार हो रहा है तो इससे गंदी बात कोई नहीं हो सकती। उज्जैन, अयोध्या और सिद्धिविनायक जैसे धार्मिक स्थलों पर भ्रष्टाचार के आरोप गंभीर हैं और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”


नासिक में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि महाराष्ट्र अंधश्रद्धा का नहीं, बल्कि प्रगतिशील विचारों का राज्य है। उन्होंने कहा कि डॉ. नरेंद्र दाभोलकर ने अंधविश्वास के खिलाफ संघर्ष किया था, कानून भी बना, लेकिन उसका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ। उन्होंने चिंता जताई कि आज भी महिलाओं का सबसे अधिक शोषण ढोंगी बाबाओं और अंधविश्वास के नाम पर हो रहा है।
राजनीतिक दल बदल पर सुप्रिया सुले ने कहा कि वह संसद के आगामी सत्र में एक निजी विधेयक (प्राइवेट मेंबर बिल) लाएंगी। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि जो जनप्रतिनिधि किसी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतता है, उसे पांच वर्ष तक पार्टी बदलने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। यदि दल बदलना है तो पहले इस्तीफा देकर दोबारा जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस दिशा में संविधान के दायरे में बदलाव की आवश्यकता है।
पार्टी में टूट की अटकलों पर उन्होंने कहा कि उनका दल पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पृथ्वीराज चव्हाण से उनकी बातचीत केवल अपनी बेटी के विवाह का निमंत्रण देने के लिए हुई थी। अमोल कोल्हे के बयान पर उन्होंने कहा कि उन्होंने बाद में अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है।
कानून-व्यवस्था पर राज्य सरकार को घेरते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि महाराष्ट्र और देश इस समय तीन बड़े संकटों का सामना कर रहे हैं। राज्य में अपराध बढ़ रहे हैं और केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार पुणे में युवाओं के बीच नशे का चलन चिंताजनक स्तर तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस का डर कम होता जा रहा है और यदि कोई नगरसेवक डॉक्टर पर हाथ उठाता है तो उसे जनप्रतिनिधि बने रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
लाडकी बहिन योजना और केवाईसी प्रक्रिया को लेकर उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि करीब आठ लाख महिलाओं को केवाईसी के कारण योजना से बाहर कर दिया गया। उन्होंने पूछा कि जब सरकार जनधन और आधार जैसी योजनाओं का प्रचार करती है, तो पात्र महिलाओं का केवाईसी समय पर क्यों नहीं हो सका।
किसानों की कर्जमाफी को लेकर भी उन्होंने सरकार की आलोचना की और कहा कि केवल घोषणाएं की गईं, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ।
राम मंदिर में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर उन्होंने कहा कि “मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। यदि उनके मंदिर में भी भ्रष्टाचार हो रहा है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा पहले कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती थी, लेकिन बाद में उन्हीं नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया। ऐसे में भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे नेता भ्रष्ट थे या नहीं। यदि नहीं थे तो भाजपा को झूठे आरोप लगाने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब भाजपा को भ्रष्टाचार पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं रह गया है।


