मुंबई वार्ता संवाददाता

अवैध स्कूलों की सूची मांगने के बाद अब अभिभावक संगठनों ने अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त स्कूलों की समीक्षा की मांग तेज कर दी है। इस संबंध में शिक्षा विभाग के उपनिदेशअल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त स्कूलों की जांच की मांग तेज, नियमों के उल्लंघन का आरोपक को पत्र लिखकर सवाल उठाया गया है कि क्या ये स्कूल तय मानकों का पालन कर रहे हैं, खासकर संबंधित अल्पसंख्यक भाषा के छात्रों के प्रवेश को लेकर।


नियमों के अनुसार किसी भी स्कूल में अल्पसंख्यक दर्जा बनाए रखने के लिए कम से कम 51 प्रतिशत छात्र उसी समुदाय से होने चाहिए। लेकिन अभिभावक संगठनों का आरोप है कि कई स्कूल इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं।ग्लोबल टीचर्स पेरेंट्स एसोसिएशन के रोहित डांडवटे ने बताया कि कुल 1738 स्कूलों में से 950 को अल्पसंख्यक दर्जा मिला हुआ है, लेकिन पिछले तीन वर्षों में कई स्कूलों में संबंधित समुदाय के केवल 10 से 15 प्रतिशत छात्र ही पढ़ रहे हैं, जो तय मानक से काफी कम है।


अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से 15 दिनों के भीतर जांच कर जवाब देने की मांग की है। साथ ही कहा है कि जो स्कूल अल्पसंख्यक मानकों को पूरा नहीं करते, उन्हें शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से पहले आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने के नियम से छूट नहीं दी जानी चाहिए।इसके अलावा, गलत जानकारी देकर अल्पसंख्यक दर्जा हासिल करने वाले स्कूलों के प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई, अयोग्य स्कूलों में 25 प्रतिशत आरटीई प्रवेश लागू करने और नियमों के पालन की जांच के लिए विशेष निरीक्षण समिति गठित करने की भी मांग की गई है।


