श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

घाटकोपर के एक स्कूल में एक पत्रकार महोदय के बुक का अनावरण समारोह हाल ही में संपन्न हुआ। कार्यक्रम हमेशा की तरह बड़ी धूमधाम से आयोजित हुआ। कई गणमान्य उपस्थित भी हुए। लेकिन किसी को भी कार्यक्रम आयोजन का मूल उद्देश्य मालूम नहीं था।


सूत्रों के अनुसार हाल ही में कार्यक्रम के कर्ताधर्ता कथित “डॉक्टर साहब” के मुँह पर तब कालिख पुत गई थी जब उनका सहकर्मी एडमिशन देने के नाम पर रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया था। साहब ने कोशिश बहुत की थी कि उनके कुकर्म कहीं प्रकाशित न हों लेकिन मुंबई में कुछ कथित चाटुकारों के अलावा ईमानदार पत्रकार भी है,नतीजतन लगभग सभी मराठी, अँग्रेजी और हिंदी अखबारों में खबर प्रकाशित हुई थी।


फिलहाल यह बात तो जगजाहिर है। जो बात नहीं सामने आई वो यह कि आखिर पत्रकार महोदय की किताब का अनावरण तथाकथित “डॉक्टर साहब” ने क्यों किया ?


सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस कार्यक्रम को आयोजित कर कार्यक्रम में भ्रष्टाचार विरोधी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को बुलाया जाना था और उन्हें कार्यक्रम में लाने की जिम्मेदारी थी “कालिया पांडेय” पर।
“डॉक्टर साहब” का उद्देश्य था किसी भी तरह भ्रष्टाचार विरोधी विभाग के इस उच्च अधिकारी को कार्यक्रम में सम्मानित कर उससे संबंध बनाया जाए और भ्रष्टाचार के मामले में फंसे अपने सहकर्मी को उक्त मामले से छुटकारा दिलाया जाए। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
उक्त भ्रष्टाचार विरोधी विभाग के उच्च अधिकारी को किसी माध्यम से मालूम हुआ कि “डॉक्टर साहब” का स्कूल एडमिशन देने के नाम पर रिश्वतखोरी के मामले में नामजद हो चुका है। उक्त अधिकारी ने स्वयं को इस कार्यक्रम से अलग कर लिया।
कार्यक्रम तो हुआ लेकिन “डॉक्टर साहब” की योजना को साकार करने में उनका नमक हलाल, चाटू पत्रकार “कालिया पांडेय ” असफल हो गया और डॉक्टर के सारे किए कराए पर पानी फिर गया।
■ चेतावनी:-
खबर का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष से नहीं अपितु पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को चेताना है कि किसी भी कार्यक्रम में जाने से पहले कार्यक्रम आयोजनकर्ता के भूतकाल की जानकारी अवश्य लें क्योंकि इसी तरह के पैतरो का इस्तेमाल अक्सर वरिष्ठ अधिकारियों को अपने मायाजाल में फांसने के लिए किया जा रहा है।


