‘आपातकाल’ में कारावास भुगत चुके नागरिकों का मानधन हुआ दोगुना।

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■ पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित करने के लिखा पत्र

मुंबई वार्ता संवाददाता

आपातकाल के दौरान कारावास भुगतने वालों का मानधन दोगुना करने के राज्य सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए उत्तर मुम्बई के पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़वणीस को पत्र लिखकर धन्यवाद ज्ञापित किया है।

जनसेवक गोपाल शेट्टी ने मुख्यमंत्री फड़वणीस को संबोधित करते हुए पत्र में लिखा है कि आपके नेतृत्व में महाराष्ट्र सरकार द्वारा लिए गए इस ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय के लिए मैं हार्दिक आभार प्रकट करता हूं। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए कारावास भुगतने वाले व्यक्तियों को मिलने वाला मानधन दोगुना करने का निर्णय स्वागत योग्य है।अतः आपका और उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा उप-मुख्यमंत्री अजितदादा पवार सहित आपके सभी मंत्रिमंडलीय सहयोगियों का दिल से अभिनंदन, धन्यवाद और कृतज्ञता व्यक्त करता हूं।

पत्र में जनसेवक गोपाल शेट्टी ने आगे लिखा है कि आपात कालदेश के इतिहास में एक काला अध्याय रहा है। २५ जून १९७५ को आपातकाल लगाया गया था। जिसके कारण संसद, न्यायपालिका, मीडिया और नागरिकों के मूलभूत अधिकार आदि को अलग रखकर केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से अपनी सत्ता की रक्षा के लिए व विरोध की हर आवाज को दबाने के लिए यह आपातकाल लगाया गया था। यह संवैधानिक मूल्यों का सरासर उल्लंघन था । आपातकाल भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था को ध्वस्त करने वाला एक निंदनीय निर्णय था। उस समय कोई वास्तविक राष्ट्रीय खतरा नहीं था, लेकिन सत्ता और राजनीतिक प्रतिशोध के लिए हजारों निर्दोष नागरिकों, छात्र नेताओं, समाजसेवकों व कार्यकर्ताओं को अन्यायपूर्ण तरीके से गिरफ्तार किया गया। कुछ लोगों पर झूठे मामले दर्ज किए गए और बेकसूर लोगों को कई दिनों तक जेल में रहना पड़ा।

इस काल में कई लोगों के व्यवसाय बर्बाद हो गए, बच्चों की पढ़ाई रुक गई, परिवारों की स्थिति खराब हो गई थी। उस भीषण काल में, देश में लोकतंत्र को बचाने के लिए निस्वार्थपूर्वक लड़ने वाले हजारों कार्यकर्ताओं ने स्वेच्छा से कारावास स्वीकार किया। उन्होंने अपने जीवन की और परिवार की परवाह किए बगैर भारतीय लोकतंत्र का दीप जलाए रखा था। ऐसे नायकों को सम्मानित करने और उनकी मानदेय राशि को दोगुना करने का राज्य सरकार का निर्णय केवल आर्थिक सम्मान नहीं है, बल्कि उनके संघर्ष के वैचारिक मूल्यों की राज्य स्तर पर सार्वजनिक स्वीकृति है।

जनसेवक गोपाल शेट्टी ने पत्र में आगे उल्लेख किया है कि आज के राजनीतिक दौर में, जब राजनीति अक्सर केवल सत्ता तक सीमित हो रही है, तो ऐसे ऐतिहासिक निर्णय से नई पीढ़ी को मूल्याधारित राजनीति की प्रेरणा मिलेगी, यही आशा है। पत्र के अंत में जनसेवक शेट्टी ने लिखा है कि आपके इस निर्णय से आज की पीढ़ी के सामने समर्पण, त्याग, और लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ने की प्रेरणा उत्पन्न होगी। आपके इस संवेदनशील, दूरदर्शी और न्यायप्रिय निर्णय के लिए पुनः एक बार आपका मनःपूर्वक अभिनंदन और धन्यवाद।

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