मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता महेश तापसे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर युवाओं के मुद्दे पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि एक ओर आरएसएस युवाओं से संवाद और विश्वास की बात करता है, जबकि दूसरी ओर भाजपा के नेता छात्रों और युवाओं के खिलाफ आपत्तिजनक और भड़काऊ बयान देते हैं।


मुंबई में हाल ही में आयोजित आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के छात्र संवाद कार्यक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए तापसे ने कहा कि आज संघ परिवार के दो अलग-अलग चेहरे दिखाई दे रहे हैं। एक चेहरा जनरेशन-जी के साथ संवाद, समझदारी और विश्वास की भाषा बोलता है, जबकि दूसरा चेहरा, यानी भाजपा, नीट परीक्षा पेपर लीक मामले में सरकार से जवाब मांगने वाले छात्रों की देशभक्ति, मंशा और चरित्र पर सवाल उठाता है।


उन्होंने सवाल किया कि आखिर संघ परिवार की वास्तविक विचारधारा किस चेहरे से सामने आती है।
महेश तापसे ने कहा कि मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा था कि “जनरेशन-जी देशविरोधी नहीं है”, लेकिन यदि ऐसा है तो फिर नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में आंदोलन करने वाले छात्रों पर भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने गंभीर और निराधार आरोप क्यों लगाए?
उन्होंने कहा कि यदि आरएसएस वास्तव में युवाओं के सम्मान, संवाद और विश्वास की बात करता है, तो भाजपा नेताओं द्वारा आंदोलनकारी छात्रों पर संदेह, अपमान और चरित्र हनन वाली भाषा का इस्तेमाल क्यों किया गया। पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करने वाले छात्रों को लोकतंत्र के जागरूक नागरिक के बजाय षड्यंत्रकारी के रूप में क्यों पेश किया गया?
तापसे ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और सांसद कंगना रनौत के बयानों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने आंदोलनकारी छात्रों और युवाओं के बारे में बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेतृत्व या युवाओं के सम्मान की बात करने वाले किसी भी वरिष्ठ नेता ने इन बयानों की सार्वजनिक रूप से निंदा नहीं की।
उन्होंने कहा कि यह विरोधाभास संयोग नहीं बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। उनके अनुसार, एक ओर नरम और संवादप्रिय चेहरा दिखाया जाता है, जबकि दूसरी ओर विरोधी विचारों को दबाने, समाज में ध्रुवीकरण बढ़ाने और लोकतांत्रिक असहमति को बदनाम करने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि देश का युवा अब इस दोहरी राजनीति को समझ चुका है।
महेश तापसे ने कहा कि यदि मोहन भागवत वास्तव में जनरेशन-जी का सम्मान करते हैं, तो उन्हें भाजपा के उन नेताओं की सार्वजनिक रूप से आलोचना करनी चाहिए जिन्होंने बार-बार युवाओं की देशभक्ति और मंशा पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि आज का भारतीय युवा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था, रोजगार के अवसर और जवाबदेह शासन की मांग कर रहा है। इन न्यायसंगत मांगों का जवाब देने के बजाय भाजपा ने सवाल पूछने वाले युवाओं की विश्वसनीयता पर हमला करने का प्रयास किया, जो लोकतंत्र नहीं बल्कि सत्ता के अहंकार की मानसिकता को दर्शाता है।
अंत में तापसे ने आरोप लगाया कि आरएसएस और भाजपा युवाओं के मुद्दे पर अलग-अलग संदेश देकर देश के युवाओं को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं।


