उत्तर मध्य मुंबई जिला में भाजपा ने उत्तर भारतीयों को नकारा।

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श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर मध्य मुंबई जिला पदाधिकारियों की नियुक्ति की है जिसमें साफ़ नजर आता है कि उत्तर भारतीयों को नकारा गया है।

बांद्रा पूर्व, खेरवाडी , कालीना, विलेपार्ले, चांदीवली और कुर्ला विधानसभा को समाहित करने वाली उत्तर मध्य मुंबई में भाजपा जिला उपाध्यक्ष की पद पर एक भी उत्तर भारतीय को स्थान नहीं दिया गया है। मराठी वाद का मवाद इस कदर फैला है कि 69 लोगों की कार्यकारिणी में मात्र 9 उत्तर भारतीय नेताओं को जगह मिली है।

हालाकि शुभ्राशु दीक्षित को महामंत्री पद पर नियुक्त किया गया है, लेकिन 1991 से भाजपा का झंडा ढो रहे अनिल उपाध्याय, विधान सभा के उपाध्यक्ष रहे आदित्य शुक्ल, राम शब्द शर्मा, राकेश मिश्रा, वीरेंद्र दीक्षित,आदित्य राम गोपाल शर्मा, संजय गजाधर सिंह, विधान सभा उपाध्यक्ष रहे जितेंद्र शुक्ल, विधान सभा सचिव रहे राम शर्मा, उत्तर भारतीय सेल के विधान सभा अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह, में से एकाध को पार्टी ने कार्यकारिणी सदस्य बना कर छोड़ दिया है और बाकियों की पूछ तक नहीं की गई है।

इस मामले के बारे में पूछे जाने पर विधायक एवं मुंबई महामंत्री संजय उपाध्याय ने कहा कि, ” मेरे पास अन्य लोग भी शिकायत कर रहे हैं। लेकिन पार्टी में सक्रियता को देखते हुए नए लोगों को मौका दिया गया है। समय आने पर कुछ और लोगों को भी पार्टी की जिम्मेदारियां दी जाएंगी।”

इसी मामले पर पूछे जाने पर वरिष्ठ भाजपाई नेता अनिल उपाध्याय ने कहा कि,” मनसे से आए हुए लोगों को बड़ी जिम्मेदारियां दी गई है। अगर पार्टी को लगता है कि पुराने निष्ठावान, समर्पित कार्यकर्ताओं की जगह पर दूसरे पार्टियों से आयातित नेताओं को वरियता देने से पार्टी आगे बढ़ेगी तो पार्टी ठीक ही सोच रही है। ऐसे लोगों पर ही आगामी चुनावों की जिम्मेदारियां भी आयेंगी। हम तो हर हाल में पार्टी के साथ है।”

इसी मामले पर भाजपा मुंबई अध्यक्ष अमित साटम से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन उठाने की जहमत नहीं ली।

ज्ञात हो कि पिछली बार इसी जिले में 44 उपाध्यक्ष और 50 मंत्री बनाए गए थे। जिनमें से अधिकतर पदाधिकारी क्रियाशील नहीं थे। पार्टी सूत्रों के अनुसार इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने असक्रिय पदाधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया है। लेकिन यह बात भी सच है कि पार्टी में मराठीवाद छाया हुआ है इसी कारणवश कई अच्छे, सक्रिय कार्यकर्ताओं को भी दरकिनार किया गया है, जिसका खामियाजा पार्टी को आगामी मनपा चुनावों में भुगताना पड़ सकता है।

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