मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

सर जे.जे. मार्ग पुलिस ने एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पिछले 12 वर्षों से गुजरात, मध्य प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड और महाराष्ट्र समेत पांच राज्यों के 18 से 20 पुलिस थानों में वांछित था। जळगांव की अदालत ने उसे फरार घोषित कर रखा था।


पुलिस के अनुसार, सर जे.जे. मार्ग थाने में वर्ष 2024 में दर्ज अपराध क्रमांक 530/2024 के तहत विष्णु रत्न गुडेकर (53) ने शिकायत दी थी कि उनके बेटे को ठाणे स्थित राजीव गांधी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने का झांसा देकर 42 लाख रुपये की ठगी की गई। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 419, 420, 465, 467, 468, 471 और 120 (बी) के तहत मामला दर्ज किया गया था।


वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक रईस शेख और पुलिस निरीक्षक राहुल पवार के मार्गदर्शन में पुलिस उपनिरीक्षक प्रशांत नेरकर और अपराध प्रकटीकरण दल ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी एक आदतन अपराधी है और पिछले 12 वर्षों से विभिन्न राज्यों में इसी प्रकार की ठगी के मामलों में वांछित है।
आरोपी की तलाश में पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और गुप्त सूचना के आधार पर गुजरात, राजस्थान, लोणावला और महाबलेश्वर सहित कई स्थानों पर छापेमारी की, लेकिन वह लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा। इसी दौरान जानकारी मिली कि उत्तराखंड पुलिस भी उसकी तलाश में महाबलेश्वर पहुंची थी, जिसके बाद वह वहां से भागकर मुंबई के आग्रीपाड़ा क्षेत्र की एक इमारत में छिप गया।
गुप्त सूचना मिलने पर पुलिस उपनिरीक्षक प्रशांत नेरकर और उनकी टीम ने करीब छह घंटे तक अलग-अलग भेष बदलकर निगरानी की और आखिरकार आरोपी को शातिर तरीके से दबोच लिया। पूछताछ में उसकी संलिप्तता सामने आने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान अबीद यूसुफ अंसारी (51) के रूप में हुई है। वह नागपाड़ा स्थित हुसेनीबाग इलाके के बाडलीवाला अपार्टमेंट में रहता है और फिलहाल बेरोजगार है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ वर्ष 2009 में नागपाड़ा, 2014 में जळगांव जिले के पेठ थाने तथा 2015 में आग्रीपाड़ा थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले दर्ज हैं। इसके अलावा मुंबई शहर के तीन, महाराष्ट्र के पांच, गुजरात के चार, दिल्ली के तीन, मध्य प्रदेश के दो और उत्तराखंड के एक मामले में भी उसके वांछित होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस को आशंका है कि उसने देश के कई अन्य स्थानों पर भी इसी तरह की ठगी की है और इस संबंध में संबंधित एजेंसियों को सूचित किया जा रहा है।
इस कार्रवाई को पुलिस उपायुक्त (जोन-1) मनीष केलवेनिया, सहायक पुलिस आयुक्त डोंगरी विभाग, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक रईस शेख तथा पुलिस निरीक्षक राहुल पवार के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया। जांच टीम में पुलिस उपनिरीक्षक प्रशांत नेरकर, हेड कांस्टेबल तडवी, घाडगे, पुलिस सिपाही शेवरे, चौधरी, पठाण तथा तकनीकी सहायता प्रदान करने वाले हेड कांस्टेबल सचिन पाटिल शामिल थे।


