मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

रायगढ़ जिले के कर्जत तालुका में प्रस्तावित पंप स्टोरेज परियोजना को लेकर उठ रहे सवालों के बीच परियोजना के समर्थन में कई महत्वपूर्ण दावे भाजपा सांसद उज्जवल निकम ने किए हैं। इन दावों के अनुसार, यह गुजरात की नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की परियोजना है। इससे राज्य में लगभग 30,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और उत्पादित बिजली का लाभ भी महाराष्ट्र को मिलेगा। परियोजना को कोयले पर आधारित बिजली उत्पादन के विकल्प के रूप में पेश किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करने में मदद मिलने का दावा किया गया है।


परियोजना से संबंधित जानकारी के अनुसार, इससे महाराष्ट्र को 12,000 मेगावाट बिजली उपलब्ध हो सकेगी। पंप स्टोरेज परियोजना का उद्देश्य जरूरत के समय बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इसमें अतिरिक्त बिजली का उपयोग करके पानी को ऊंचाई पर स्थित जलाशय में पहुंचाया जाता है। बिजली की मांग बढ़ने पर पानी को नीचे छोड़कर टर्बाइन के माध्यम से बिजली उत्पन्न की जाती है।
सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से बनने वाली अतिरिक्त बिजली का उपयोग इस प्रक्रिया में किया जा सकता है।परियोजना के समर्थकों का कहना है कि पंप स्टोरेज परियोजना का स्थान भौगोलिक परिस्थितियों और जलाशयों की उपलब्धता के आधार पर तय होता है। इसलिए इसे किसी भी दूसरे स्थान पर मनमाने ढंग से स्थापित नहीं किया जा सकता।


■ वन भूमि के बदले 253 हेक्टेयर जमीन देने का दावा
परियोजना के लिए लगभग 233 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता बताई गई है। इसके बदले वैकल्पिक वृक्षारोपण के उद्देश्य से संबंधित कंपनी द्वारा वन विभाग को पहले ही 253 हेक्टेयर जमीन सौंपने का दावा किया गया है। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, इसके बाद वन विभाग ने आवश्यक अनुमति दी।
यह भी दावा किया गया है कि परियोजना के लिए लगभग 18 महीने तक वैधानिक मंजूरी की प्रक्रिया पूरी की गई। पर्यावरणीय अध्ययन के बाद संबंधित प्राधिकरणों से आवश्यक अनुमतियां प्राप्त की गईं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित मंजूरियों और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन की आधिकारिक रिपोर्टों का परीक्षण आवश्यक है।
■ भीमाशंकर अभयारण्य और ज्योतिर्लिंग मंदिर से दूरी
यह परियोजना रायगढ़ जिले के कर्जत तालुका के सैदोनगर क्षेत्र में प्रस्तावित बताई गई है। दी गई जानकारी के मुताबिक, परियोजना स्थल भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य से लगभग 16 किलोमीटर दूर है। परियोजना के सभी घटक अभयारण्य की सीमा और पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ईको-सेंसिटिव जोन) से बाहर होने का दावा किया गया है। इस आधार पर कहा गया है कि अभयारण्य के भीतर पेड़ों की कटाई या निर्माण कार्य नहीं किया जा रहा है।इसी तरह, भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर से परियोजना की दूरी लगभग 20 किलोमीटर बताई गई है। दावा है कि मंदिर के आसपास किसी भी प्रकार का परियोजना कार्य प्रस्तावित नहीं है।
■ 60 हजार पौधे कंपनी और 30 हजार पौधे वन विभाग लगाएगा
परियोजना क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण की योजना भी बताई गई है। इसके तहत टोरेंट कंपनी द्वारा 60,000 पेड़ लगाने और वन विभाग द्वारा 30,000 पेड़ लगाने का दावा किया गया है। इस प्रकार कुल 90,000 पेड़ लगाने की योजना बताई गई है।हालांकि, वृक्षारोपण की वास्तविक सफलता केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होती। इसके लिए पौधों के जीवित रहने की दर, उनके रखरखाव और दीर्घकालीन निगरानी का विवरण भी महत्वपूर्ण होगा।
■ कोयले की खपत और कार्बन उत्सर्जन में कमी का दावा
परियोजना के पक्ष में सबसे महत्वपूर्ण तर्क यह दिया जा रहा है कि इससे मांग के चरम समय में बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। दावों के अनुसार, इतनी बिजली को कोयला आधारित संयंत्रों से उत्पन्न करने की स्थिति में हर साल लगभग 46 लाख टन कोयले के दहन से बचा जा सकता है।इसके अलावा, परियोजना के कारण हर साल लगभग 40 लाख वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन के बराबर उत्सर्जन टालने का दावा किया गया है। हालांकि, वास्तविक पर्यावरणीय लाभ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि पंपिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली किस स्रोत से आती है और परियोजना का संचालन किस प्रकार किया जाता है।
■ पानी, जमीन और फ्लाई ऐश की बचत
परियोजना के समर्थकों के अनुसार, इतनी ही क्षमता के कोयला आधारित बिजली संयंत्र की तुलना में पंप स्टोरेज परियोजना से हर साल लगभग 19.7 अरब लीटर शीतलन जल की बचत हो सकती है। दावा है कि इतनी मात्रा में पानी लगभग चार लाख लोगों की जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त है।इसके साथ ही, कोयला आधारित बिजली उत्पादन से निकलने वाली लगभग 16 लाख टन फ्लाई ऐश प्रतिवर्ष उत्पन्न होने से बचने और 40 से 50 हेक्टेयर क्षेत्र में नए खुले खनन की आवश्यकता टालने का भी दावा किया गया है।
■ पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन जरूरी
कर्जत पंप स्टोरेज परियोजना को लेकर प्रस्तुत जानकारी में निवेश, बिजली उत्पादन, रोजगार, वृक्षारोपण और कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे संभावित लाभों पर जोर दिया गया है। वहीं, किसी भी बड़ी परियोजना का समग्र मूल्यांकन करते समय भूमि उपयोग, स्थानीय जल स्रोतों, जैव विविधता, निर्माण कार्य और आसपास के गांवों पर पड़ने वाले प्रभावों की भी जांच जरूरी है।इसलिए परियोजना के पक्ष में किए गए दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए पर्यावरणीय मंजूरियों, वन विभाग के दस्तावेजों, जल उपयोग संबंधी अनुमानों और उत्सर्जन में कमी के आकलन की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि परियोजना से महाराष्ट्र को होने वाले आर्थिक और ऊर्जा संबंधी लाभों के साथ पर्यावरण संरक्षण के मानकों का किस हद तक पालन सुनिश्चित किया गया है।


