मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई की उपनगरीय लोकल रेल सेवा में सोमवार, 26 अक्टूबर को सिग्नल प्रणाली में खराबी और ओवरहेड तार से जुड़ी तकनीकी समस्या के कारण भारी व्यवधान उत्पन्न हो गया। मध्य रेलवे की सेवाएं घंटों प्रभावित रहीं, जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान भांडुप स्टेशन पर लोकल ट्रेन की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई, जबकि घाटकोपर और विक्रोली के बीच रेलवे पटरियों पर दो अन्य लोगों के शव मिले। इस तरह तीन लोगों की मौत की घटनाएं सामने आईं।


■ भांडुप स्टेशन पर 21 वर्षीय युवक की मौत
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, मृतक की पहचान मुलुंड निवासी 21 वर्षीय साहिल थिते के रूप में हुई है। सोमवार शाम करीब 5:30 बजे वह भांडुप स्टेशन पर एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए रेलवे पटरियां पार कर रहा था। इसी दौरान वह वातानुकूलित लोकल ट्रेन की चपेट में आ गया।हादसे के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मामले में कुर्ला राजकीय रेलवे पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।


■ घाटकोपर-विक्रोली के बीच दो शव मिले
इसी दिन रात करीब 9:30 बजे घाटकोपर और विक्रोली रेलवे स्टेशनों के बीच पटरियों पर दो लोगों के शव मिले। इन दोनों की पहचान और मौत के कारणों की तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी थी। शवों को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए राजावाड़ी अस्पताल भेजा गया।इन घटनाओं के पीछे की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए रेलवे पुलिस जांच कर रही है।
■ कांजुरमार्ग में सिग्नल केबिन में आग से रेल सेवा प्रभावित
मध्य रेलवे की सेवाएं प्रभावित होने के पीछे दो प्रमुख तकनीकी घटनाएं सामने आईं। पहली घटना सुबह करीब 9:23 बजे मुलुंड और ठाणे के बीच डाउन धीमी लाइन के ओवरहेड उपकरण में एक तार लटकता हुआ मिलने की थी। इसके बाद रेलवे अधिकारियों ने बिजली आपूर्ति बंद कर तार से जुड़ी समस्या दूर करने का काम किया। यह खंड सुबह करीब 10:48 बजे बहाल किया गया।इसके कुछ ही समय बाद सुबह करीब 9:33 बजे कांजुरमार्ग स्टेशन के सिग्नल केबिन में आग लग गई। इससे विक्रोली और भांडुप के बीच छह रेल लाइनों पर लगभग 24 सिग्नल बंद हो गए। सिग्नल प्रणाली प्रभावित होने के कारण ट्रेनों का परिचालन निर्धारित गति और अंतराल से करना संभव नहीं रहा। रेलवे कर्मचारियों को वैकल्पिक सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत ट्रेनों को आगे बढ़ाना पड़ा, जिससे सेवाओं में देरी बढ़ती गई।
■ 80 लोकल ट्रेनें रद्द, 70 से 90 मिनट तक देरी
तकनीकी खराबियों का असर मध्य रेलवे की मुख्य और हार्बर लाइन, दोनों पर पड़ा। कुल 80 लोकल सेवाएं रद्द करनी पड़ीं, जिनमें मुख्य लाइन की 60 और हार्बर लाइन की 20 सेवाएं शामिल थीं। कई लोकल ट्रेनें 70 से 90 मिनट तक रुकी रहीं। लंबी दूरी की ट्रेनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई।ट्रेनें लंबे समय तक खड़ी रहने से कई यात्री नीचे उतरकर पटरियों के रास्ते अगले स्टेशन की ओर जाते दिखाई दिए। इससे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई, क्योंकि आसपास की लाइनों पर भी ट्रेनें सीमित रूप से चल रही थीं।
■ सड़क और मेट्रो का सहारा लेने को मजबूर हुए यात्री
लोकल सेवाओं में व्यवधान के कारण अनेक यात्रियों ने बस, ऑटो रिक्शा और मेट्रो का सहारा लिया। सड़क मार्ग पर यात्रियों की संख्या बढ़ने से ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे सहित प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ। कई यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में सामान्य से काफी अधिक समय लगा। कुछ कॉलेजों में विद्यार्थियों के समय पर नहीं पहुंच पाने के कारण परीक्षाएं भी पुनर्निर्धारित करनी पड़ीं।रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सिग्नल प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से बहाल किया गया। शाम तक विभिन्न सिग्नल और ट्रैक पहचान प्रणालियों की बहाली का काम पूरा हुआ, लेकिन सेवाओं पर पड़े असर के कारण देर रात तक देरी जारी रही।
सिग्नल केबिन में आग लगने के कारणों की जांच किए जाने की बात भी रेलवे प्रशासन ने कही है।इस घटना ने मुंबई की लोकल रेल व्यवस्था में तकनीकी खराबियों के दौरान यात्रियों की सुरक्षा और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। रेलवे पटरियों पर पैदल चलना बेहद खतरनाक है, क्योंकि दूसरी लाइन पर ट्रेन का परिचालन जारी हो सकता है।


