मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे-पाटिल द्वारा जारी कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग में 500 करोड़ रुपये के लेन-देन का उल्लेख सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में विवाद तेज हो गया है। मुंबई पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। वहीं, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से भी जांच कराने की मांग की है।


पुलिस की जांच का मुख्य उद्देश्य ऑडियो रिकॉर्डिंग की वास्तविकता का पता लगाना, उसमें सुनाई देने वाली आवाजों की पहचान करना और कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़े तथ्यों की जांच करना है। फिलहाल, 500 करोड़ रुपये के कथित भुगतान की पुष्टि नहीं हुई है और ऑडियो की प्रामाणिकता की जांच की जानी बाकी है।
■ तीन सदस्यीय एसआईटी करेगी जांच
मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती ने 26 अक्टूबर को विशेष जांच दल गठित करने का आदेश जारी किया। इस एसआईटी की अगुवाई अतिरिक्त पुलिस आयुक्त शैलेश बालकवडे करेंगे। पुलिस उपायुक्त विजयकांत सागर और साइबर अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त बजरंग बन्सोडे को इसका सदस्य बनाया गया है।जांच दल को ऑडियो रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच कराने, उसमें दर्ज आवाजों और बातचीत की पड़ताल करने तथा कथित लेन-देन से संबंधित तथ्यों का पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई है। यह कार्रवाई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश के बाद की गई है।
■ क्या है 500 करोड़ रुपये का पूरा विवाद?
यह विवाद मनोज जरांगे-पाटिल द्वारा अक्टूबर में जारी किए गए एक कथित ऑडियो क्लिप से शुरू हुआ। जरांगे ने 22 अक्टूबर को छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान इस रिकॉर्डिंग का उल्लेख किया था। रिपोर्टों के अनुसार, कथित बातचीत में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुछ पदाधिकारियों के बीच राजनीतिक रणनीति और 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले की परिस्थितियों पर चर्चा होने का दावा किया गया है।
रिकॉर्डिंग को लेकर आरोप है कि मराठा आरक्षण आंदोलन को प्रभावित करने के लिए जरांगे-पाटिल को शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के माध्यम से 500 करोड़ रुपये दिए गए थे। श्रीकांत शिंदे महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे हैं। हालांकि, यह आरोप अभी जांच के अधीन है और इससे संबंधित किसी भुगतान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।मनोज जरांगे-पाटिल ने पैसे लेने के आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि किसानों और आम नागरिकों के मुद्दे उठाने के कारण उन्हें और मराठा आंदोलन को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है।
एकनाथ शिंदे और श्रीकांत शिंदे ने भी अपने माध्यम से जरांगे को पैसे पहुंचाए जाने के आरोपों को खारिज किया है। भाजपा की ओर से भी ऑडियो की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए गए हैं और इसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जरिए तैयार किए जाने की आशंका जताई गई है। इन दावों की भी जांच की जानी है।
■ संजय राउत ने अमित शाह को पत्र लिखकर क्या कहा?
शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने 26 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस कथित लेन-देन की जांच महाराष्ट्र पुलिस के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय से कराने का अनुरोध किया।राउत ने सवाल उठाया कि यदि 500 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था, तो यह पैसा किसने दिया, किसे दिया गया और यदि जरांगे-पाटिल तक यह रकम नहीं पहुंची, तो फिर पैसा कहां गया? उन्होंने कथित धन के स्रोत और उसके गंतव्य का पता लगाने की मांग की।
राउत ने इस मामले में धनशोधन की आशंका जताते हुए धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत जांच की आवश्यकता बताई। उन्होंने अमित शाह से आग्रह किया कि संबंधित एजेंसियों को जांच के निर्देश दिए जाएं और मामले से जुड़े तथ्यों को जनता के सामने लाया जाए। हालांकि, धनशोधन या किसी अन्य अपराध की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
■ महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ा विवाद
इस ऑडियो क्लिप के सामने आने के बाद भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच राजनीतिक तनाव की खबरें सामने आई हैं। विपक्ष ने भी इस मामले को लेकर सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहले ही रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मुंबई पुलिस ने एसआईटी का गठन किया।अब जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि रिकॉर्डिंग असली है या उसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ की गई है, उसमें सुनाई देने वाली आवाजें किन लोगों की हैं और क्या कथित 500 करोड़ रुपये के लेन-देन का कोई वास्तविक आधार है।
फिलहाल, यह मामला आरोपों और जांच के चरण में है। एसआईटी की फॉरेंसिक जांच और आगे सामने आने वाले साक्ष्यों से ही इन आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सकेगी।


