विपिन शुक्ल/मुंबई वार्ता

भाजपा के तटस्थ कार्यकर्ता संदीप तिवारी के नए कार्यालय का उद्घाटन विश्वास अपार्टमेंट, शॉप नंबर 4, शंकर पवासे रोड, राय वैली के सामने किया गया। कार्यालय का उद्घाटन महेश गायकवाड़ के हाथों संपन्न हुआ। इस अवसर पर पैनल क्रमांक 13 के कुछ स्थानीय नगरसेवकों ने भी शिरकत की।


कार्यालय उद्घाटन के मौके पर शाम 4 बजे से सुंदर कांड का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में स्थानीय नागरिक, समर्थक और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। धार्मिक आयोजन और उमड़ी भीड़ ने कार्यक्रम को खास बना दिया।कार्यालय खुलते ही स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासतौर पर चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जा रहे पैनल क्रमांक 13 में संदीप तिवारी की सक्रियता को आगामी चुनावों की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
जिस परिसर में यह कार्यालय खोला गया है, वहां से पूर्व नगरसेवक मनोज राय का भी लंबे समय से राजनीतिक प्रभाव रहा है। अब तक संदीप तिवारी को मनोज राय का करीबी और उनके दाहिने हाथ के रूप में जाना जाता था। दोनों के बीच वर्षों से राजनीतिक और सामाजिक समन्वय देखने को मिलता रहा है। ऐसे में तिवारी का इस क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से कार्यालय स्थापित करना कई राजनीतिक संकेत दे रहा है।


स्थानीय राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संदीप तिवारी का यह कदम मनोज राय के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। चुनावी समीकरणों में यह बदलाव मतदाताओं की दिशा और रणनीति को प्रभावित कर सकता है। क्षेत्र में चर्चा है कि तिवारी का प्रभाव और जनसंपर्क मनोज राय के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकता है।हालांकि, संदीप तिवारी की ओर से फिलहाल कोई खुली राजनीतिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कार्यालय उद्घाटन और धार्मिक आयोजन में उमड़ी भारी भीड़ को उनकी बढ़ती ताकत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह कार्यालय स्थानीय राजनीति का नया केंद्र बन सकता है।
इस अवसर पर प्रमुख रूप सेसुरेश उपाध्याय, राकेश (मुन्ना) मिश्रा, अमित (मोनू) पाठक, शिवा पाण्डेय, शिवम मिश्रा, बिपिन मिश्रा, दयाराम यादव, संदीप सिंह, कपिल चौहान, रामसूरत चौहान, सुभाष गुप्ता, अनिल गुप्ता, ज्ञानसार पाण्डेय, पवन दुबे, मनीष मौर्या, प्रीतम गुप्ता और उमेश पाण्डेय उपस्थित रहे।फिलहाल, इस घटनाक्रम ने राय वैली और आसपास के इलाकों की राजनीति में नई सरगर्मी पैदा कर दी है। आने वाले चुनावों में इसका क्या असर होगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।



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