■ कर्जमाफी के लिए समितियों की नौटंकी बंद करो और तुरंत कर्जमाफी की घोषणा करे ।
■ फडणवीस, शिंदे और अजीत पवार ने अगर किसान, बहनें और जनता के सब्र का इम्तिहान लिया, तो यह बहुत महंगा पड़ेगा।
मुंबई वार्ता संवाददाता

जब आज की सबसे बड़ी जरूरत किसानों की कर्जमाफी है, तब भाजपा की युती सरकार जानबूझकर इससे बच रही है। बेमौसम बारिश से किसान संकट में है, फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा। अन्नदाता की कमर टूट चुकी है और सरकार अब भी कर्जमाफी देने से इंकार कर रही है। चुनाव के समय कर्जमाफी का वादा करके जनता से वोट लिए गए और सत्ता में आए, और अब सत्ता में आने के बाद बेशर्मी से कह रहे हैं कि हमने ऐसा कोई वादा किया ही नहीं। किसान कर्जमाफी और बहनों को 2100 रुपये देना अगर इस सरकार को नहीं आता, तो कुर्सी खाली करनी चाहिए।ऐसा तीखा इशारा महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने दिया है।


इस विषय पर बोलते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि पुणे में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के कार्यक्रम में जब गुस्साए किसानों ने सवाल पूछा, तो उन्होंने धमकाया यह दादागिरी नहीं चलेगी। आप जनता के सेवक हैं, मालिक नहीं, यह समझना होगा। अब जब कर्जमाफी की बात आती है तो समिति बनाने की बात करते हैं, चुनाव में वादा करते समय समिति की याद नहीं आई थी? उस वक्त राज्य की आर्थिक हालत नहीं दिखी थी? और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि अगर किसानों का सातबारा कोरा करने के लिए पैसा नहीं है, तो अडानी-अंबानी को हजारों करोड़ का फायदा पहुंचाने के लिए पैसा कहां से आता है? जब बहनों और किसानों को पैसा देना होता है, तभी तिजोरी क्यों याद आती है?
कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि भाजपा की युती सरकार केवल अडानी-अंबानी के लिए रेड कारपेट बिछा रही है, लेकिन किसानों और राज्य की बहनों को पैसा देने के समय बहाने बना रही है। सुरजागढ़ की खदान से मलाई खाने, समृद्धि महामार्ग में भ्रष्टाचार, घोड़बंदर-भायंदर सुरंग परियोजना में भ्रष्टाचार, पुणे रिंग रोड और अब अडानी के हित में शक्तिपीठ के नाम पर हजारों करोड़ का घोटाला, ये सब फडणवीस, अजीत पवार और एकनाथ शिंदे की सरकार में हो रहा है। सत्ता की मलाई खा सकते हैं, लेकिन किसानों और बहनों को देने के लिए पैसे नहीं हैं यह सवाल सपकाल ने उठाया।
अगर राज्य सरकार की तिजोरी खाली है, तो दिल्ली जाकर मोदी और शाह से राज्य के लिए फंड लेकर आईए, इतनी हिम्मत तो दिखाएं। समितियों का खेल बंद करें और तत्काल किसान कर्जमाफी और बहनों को 2100 रुपये की सहायता दें। किसान, बहनों और जनता के सब्र का इम्तिहान मत लें यह बहुत महंगा पड़ेगा, ऐसी चेतावनी हर्षवर्धन सपकाल ने दी।


