मुंबई वार्ता संवाददाता

गार्गोटी संग्रहालय महाराष्ट्र के सिन्नर में स्थित भारत का पहला और एकमात्र प्राकृतिक रत्न, खनिज और जीवाश्म संग्रहालय है। इसकी स्थापना भारतीय नौसेना से रिटायर सैन्य अधिकारी के.सी. पांडे ने की थी। यहाँ दुनिया भर से लाए गए दुर्लभ क्रिस्टल, खनिज और प्राचीन कलाकृतियों का विशाल संग्रह मौजूद है। संग्रहालय में प्रवेश करते ही सबसे पहले आपको भारत माता की दिव्य मूर्ति नजर आती है। सामने क्रिस्टल की गणपति बप्पा की भव्य मूर्ति। फिर शुरू होती है पत्थरों की एक ऐसी दुनिया, जो आपसे बातें करते नजर आते हैं।


म्यूजियम में रखे गए लाखों साल पुराने पत्थर अद्भुत दृश्य उपस्थित करते हैं। चांद और मंगल ग्रह के पत्थर से लेकर डायनासोर के जीवाश्म आपको नजर आएंगे। महात्मा गांधी की ऐतिहासिक कलम से लेकर के भगवान शंकर की अद्भुत प्रतिमा आपको नजर आएगी। चीफ केसी पांडे की 40 वर्षों से अधिक की अथक मेहनत आपको इतिहास के पन्नों की तरह बदलती नजर आएगी। 30 से अधिक देशों से संग्रह किए गए अद्भुत कीमती पत्थर आपकी आंखों को खुली रखने पर मजबूर कर देगा। यहां आपको भारत के दक्कन के बेहतरीन ज़ियोलाइट खनिज और क्रिस्टल देखने को मिलेंगे। पहली मंजिल पर दुनिया भर से एकत्र किए गए बेशकीमती रत्न, हीरक और दुर्लभ पत्थर रखे गए है।


दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक क्रिस्टल नमूनों को देखकर आप कहेगे– वाह! क्या बात है? आज पूरी दुनिया में गर्गोटी संग्रहालय का नाम है। देश–विदेश से प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में लोग यहां आते हैं। यहां गाइड की व्यवस्था बिल्कुल मुफ्त की गई है। संग्रहालय में एक खास बात है कि आप यहां से कीमती पत्थरों से बनाई गई आकर्षक वस्तुएं खरीद सकते हैं, जिन्हें आप सुनहरे यादगार के रूप में अपने पास सुरक्षित रख सकते हैं।भारतीय नौसेना में 15 वर्षों तक चीफ एयर आर्टिफिशर के पद पर देश की सेवा करने वाले केसी पांडे, 1993 में सेवानिवृत हुए।
केसी पांडे का मन पहले से ही पत्थरों में रम चुका था। 1977 से वे लगातार वेशकीमती और दुर्लभ पत्थरों का संकलन कर रहे थे। उन्होंने सिन्नर में जगह लेकर म्यूजियम बनाने का काम शुरू किया और देखते ही देखते शानदार गार्गोटी म्यूजियम बनकर तैयार हो गया। वर्ष 2001 में हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे ने इस म्यूजियम का यादगार उद्घाटन किया। उन्होंने शानदार म्यूजियम के लिए पांडे जी को बधाई दी। फिर शुरू हुआ म्यूजियम की लोकप्रियता का सफर । अब तक देश की सैकड़ो नामी गिरामी हस्तियां यहां आ चुकी हैं।
बॉलीवुड से जुड़े अनेक फिल्मी सितारों ने खूबसूरत पत्थरों को निहारा और सराहना की है। चीफ केसी पांडे के पिता पुलिस अधिकारी थे। उनके असमय जाने के बाद मां ने उन्हें जो संस्कार और आत्मबल दिया उसका नतीजा है कि आज अंतरराष्ट्रीय जगत में इस म्यूजियम की चर्चा की जाती है। चीफ केसी पांडे उम्र के इस पड़ाव पर भी किसी युवा की तरह सक्रिय और ऊर्जावान हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई को वे अपना आदर्श मानते हैं और उनकी पंक्तियां अक्सर गुनगुनाते रहते हैं।


